Kartavya Movie Review: यदि किसी ने ‘पाताललोक’ वैब सीरीज देखी हो तो उसे फिल्म ‘कर्तव्य’ अलग नहीं लगेगी. वही डार्क टेंपलेट, हरियाणवी टोन, जाति पर सवाल और औनरकिलिंग. इन सब के साथ पैरलेल में चलती एक स्टोरी जो किसी गुथी को सुलझा रही हो.

फिल्म की शुरुआत देख कर लगता भी है कि शायद इस बार कोई ऐसा हिंदी थ्रिलर देखने को मिलेगा जो सिर्फ गोलीबारूद नहीं, समाज की सड़ांध पर भी चोट करेगा, लेकिन जैसेजैसे फिल्म आगे बढ़ती है, समझ आने लगता है कि ‘कर्तव्य’ अपने ही बनाए चक्रव्यूह में फंसती दिखाई देती है.
फिल्म की कहानी हरियाणा के जामली नाम के इलाके में सेट है. यहां सैफ अली खान पुलिस अफसर पवन मलिक के किरदार में है, जो अपनी नौकरी ईमानदारी से करना चाहता है. उस की जिंदगी तब उलझ जाती है जब उसे जानीमानी पत्रकार की सुरक्षा का जिम्मा मिलता है जिस में वह असफल साबित होता है. पत्रकार मारी जाती है और उसे उस के कातिलों का पता लगाना होता है.

पड़ताल शुरू होती है तो बच्चों के गायब होने और बाबा आनंद श्री (सौरभ द्विवेदी) से जुड़ी जांच उस के हाथ लगती है. दूसरी तरफ उस के अपने परिवार में उठापटक चल रही है. उस के छोटे भाई दीपक मलिक (सौरभ अबरोल) का दूसरी जाति की लड़की से भाग कर शादी करना गांव में बवाल खड़ा कर देता है.

गांव में खाप बैठती है. फैसला होता है कि दोनों लड़कालड़की को ढूंढ कर मार दिया जाए. वहीं दूसरी तरफ पता चलता है पत्रकार को मारने वाला 14-15 साल का एक किशोर हरपाल (यधुवीर अहलावत) है जो आनंद श्री के इशारे पर यह काम करता है. अब इसी लड़के को पवन को ढूंढना है.
फिल्म में अच्छी बात है कि फिल्म के मेन किरदार पवन को किसी हीरो की तरह नहीं दिखाया गया है, उस की सीमाएं तय कर दी गई हैं. जैसे आनंद श्री के गुंडों से पिट रहा है, वह खाप से अपने भाई को नहीं बचा पाता, वहीँ हरपाल को भी आनंद श्री से नहीं बचा पाता.

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