Hindi Story: सुधीर सोच रहा था मां क्या सोचेंगी जब बैंक के संयुक्त खाते में उन्हें 50 हजार रुपयों की जगह केवल 400 रुपए मिलेंगे. शायद उन्हें इस बात का आभास हो जाएगा कि फर्ज की जिस किताब पर सुधीर नोटों का कवर चढ़ाता आ रहा था, उस कवर को शायद उस ने हमेशा के लिए फाड़ कर फेंक दिया है.
दिल्ली के इं?दिरा गांधी हवाई अड्डे पर पिताजी के अलावा सुधीर के स्वागत के लिए घर के सभी लोग आए थे. लंदन से उड़ान भर कर विमान रात को 3 बजे दिल्ली पहुंचा था. पिताजी के लिए इतनी रात में हवाई अड्डे पहुंचना काफी कठिन था. 5 साल पहले उन को पक्षाघात हो गया था. तभी से वे घर की चारदीवारी में कैद हो कर रह गए थे. पिताजी एक प्राइवेट कंपनी में ऊंचे पद पर काम करते थे. कंपनी वालों ने उन को काफी अच्छी रकम दी थी उन की लंबी सेवा के उपलक्ष्य में. सब्जीमंडी में पुश्तैनी घर की निचली मंजिल पर पिताजी का कब्जा था.
परिवार में 4 बच्चों में सिर्फ सुधीर ही काम पर लगा हुआ था. 7 साल पहले वह बनारस से इंजीनियरिंग कर के लंदन चला गया था. वहीं नौकरी मिल गई. इरादा था कि कुछ अनुभव हासिल कर के भारत लौट आएगा, परंतु ऐसा हो न पाया.
पिताजी को जब पक्षाघात हुआ था तब वह भारत आया था. उस का बड़ा मन था कि लंदन की नौकरी छोड़ कर भारत में ही परिवार के साथ रहे. पर घर के सब लोगों की सलाह थी कि अगर एक बार लंदन से भारत आ गया तो फिर दोबारा चाह कर भी लंदन नहीं जा सकेगा. भारत में तो उसे मुश्किल से 5-6 हजार रुपए की नौकरी मिलेगी. फिर कोई भरोसा नहीं कि उसे नौकरी दिल्ली में ही मिल पाएगी.
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