Motherland Movie: देशभक्ति की बातें करना आसान है. गलवान के शहीदों के नाम पर नारे लगाना भी आसान है. लेकिन जब उन्हीं शहीदों की बहादुरी और चीन के साथ हुई खूनी झड़प पर फिल्म बनाने की बात आती है तो इतनी मुश्किलें क्यों खड़ी हो जाती हैं? सलमान खान की फिल्म मातृभूमि का अब तक का सफर तो यही सवाल खड़ा करता है।
सलमान खान निर्मित व उनके अभिनय से सजी फिल्म की शुरुआत ‘बैटल ऑफ गलवान’ नाम से हुई थी. इसकी कहानी शिव अरोरा और राहुल सिंह की किताब ‘इंडियाज मोस्ट फियरलेस-3’ के एक अध्याय पर आधारित थी. फिल्म की शूटिंग अगस्त 2025 में शुरू हुई. लद्दाख में 45 दिन शूटिंग हुई और सितंबर में वहां का काम पूरा होने की खबर आ गई थी. यानी फिल्म का बड़ा हिस्सा शूट हो चुका था. तब तक किसी ने कल्पना नहीं की थी कि आगे इस फिल्म के साथ इतना कुछ घटित होने वाला है.
दिसंबर 2025 में फिल्म ‘बैटल आफ गलवान’ का टीजर आया और चीन को मिर्ची लग गई. चीन के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने फिल्म पर सवाल उठाए. उसे फिल्म में दिखाई गई गलवान की कहानी पर एतराज था. बस, फिर क्या था, फिल्म की मुश्किलें बढ़ने की खबरें आने लगीं. सरकारी हस्तपक्षेप की भी खबरे आनी शुरू हो गयीं.
सबसे पहले फिल्म का नाम ‘बैटल ऑफ गलवान’ से बदलकर ‘‘मातृभूमिः मे वॉर रेस्ट इन पीस’ कर दिया गया.पर फिल्म का नाम बदलने के बाद मुसीबतें खत्म नही हुई. फिर खबरें आईं कि फिल्म के कई दृश्य दोबारा फिल्माए जा रहे हैं, कहानी में बदलाव हो रहा है और फिल्म से कुछ हिस्से हटाकर उनकी जगह नए फिल्माए गए हिस्से जोड़े जा रहे हैं. यहां तक कि करीब 40 प्रतिशत फिल्म दोबारा शूट किए जाने की खबर सामने आई.
फिल्म के मूल लेखक शिव अरोरा और राहुल सिंह ने खुद को इस फिल्म से अलग कर लिया. वजह यह बताई गई कि फिल्म अब उस कहानी से काफी आगे निकल चुकी है, जिस पर इसे बनाने की शुरुआत हुई थी. मतलब बतौर लेखक शिव अरोरा और राहुल सिंह जिस कहानी को ‘बैटल आफ गलवान’ के माध्यम से लोगो तक पहुॅचाना चाहते थे, वह कहानी अब रही ही नहीं.
विचारणीय सवाल यह है कि जिस किताब और जिस सच्ची घटना के आधार पर फिल्म बनाने का फैसला हुआ, उसी कहानी से फिल्म इतनी दूर कैसे व किसके इशारे पर चली गई? क्या गलवान की कहानी में कुछ ऐसा था, जिसे दिखाना अब मुश्किल हो गया? और अगर सब कुछ ठीक था, तो फिल्म के इतने बड़े हिस्से को दोबारा फिल्माने की की जरूरत क्यों पड़ी?
बात यहीं खत्म नहीं हुई. इस बीच फिल्म में रोमांटिक गाना भी आ गया.‘तेरी सेक्सी ब्यूटी’ जैसे गाने ने लोगों को हैरान कर दिया. इस गाने को खुद सलमान खान ने ही गाया है. सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर गलवान के शहीदों की कहानी में इस तरह के गाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह अब युद्ध की फिल्म कम और रोमांस व पारिवारिक ड्रामे की फिल्म ज्यादा हो गई है? आखिर गलवान के शहीदों की कहानी में रोमांस का यह तड़का किसलिए? क्या युद्ध की गंभीर कहानी को मनोरंजन का मसाला बनाकर पेश किया जा रहा है? या फिर फिल्म की मूल कहानी ही इतनी बदल चुकी है कि अब उसे युद्ध की फिल्म कहना मुश्किल है? इस पर सलमान खान ने कहा कि सैनिक सीमा पर हमेशा वीरता के गीत नही गाता, वह रोमांटिक गाने भी गाता है..वाह क्या तर्क है…
सलमान खान की अस फिल्म के मामले में सरकार की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. कभी खबर आई कि ‘ग्लोबल टाइम्स’ की आपत्ति के बाद रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने फिल्म को रोक रखा है. अभी कुछ दिन पहले खबर आई कि केंद्र सरकार से फिल्म को हरी झंडी मिल गई है. उसके बाद फिल्म को 13 नवंबर 2026 को रिलीज करने की बात सामने आयी. यानी एक तरफ सरकारी मंजूरी की खबरें और दूसरी तरफ लगातार बदलाव की खबरें. आखिर पर्दे के पीछे चल क्या रहा था?
पर बात रूकी नहीं..अब फिल्म के रिलीज की तारीखों का खेल शुरू हुआ. पहले 13 नवंबर की तारीख सामने आई. उसके बाद 20 नवंबर की बात कही गई. 6 नवंबर 2026 को मुंबई में फिल्म के ट्रेलर लॉन्च का कार्यक्रम रखा गया. मीडिया को बुलाया गया.पत्रकार पहुंचे तो पोस्टरों पर 20 नवंबर की रिलीज तारीख पर कागज चिपका हुआ था. कुछ ही देर में पता चला कि फिल्म अब 4 दिसंबर 2026 को रिलीज होगी.
फिल्म का ट्रेलर लांच नही हुआ. पर ईवेंट पर पहुॅचे पत्रकारो को फिल्म का ट्र्रेलर ‘प्रीव्यू’ के नाम पर इस शर्त पर दिखाया गया कि ट्र्रेलर को लेकर कोई कुछ नही कहेगा,कुछ नहीं लिखेगा… बहरहाल, इसी कार्यक्रम में सलमान खान ने दावा किया कि उन्होंने फिल्म में कोई बदलाव नहीं किया है. सरकार या सेंसर बोर्ड से भी कोई परेशानी नहीं है. सलमान खान किस दबाव के चलते यह दावे मंच से कर रहे थे, यह बात मीडिया बाखूबी समझ रहा था. यही वजह है कि सलमान खान के दावों के बावजूद सवाल खत्म नहीं हुए. बताया गया कि वीएफएक्स का काम पूरा होने के बाद ट्रेलर जारी होगा.
इस पूरे तमाशे को समझना आवष्क है.फिल्म का ट्रेलर दिखाया जा रहा है, लेकिन उसके बारे में लिखने की मनाही है.आम दर्शक उसे देख नहीं सकते. रिलीज की तारीख बार-बार बदल रही है. फिल्म का नाम बदल चुका है. दोबारा शूटिंग की खबरें आ चुकी हैं. लेखकों ने फिल्म से अपना पल्ला झाड़ लिया है. लेकिन निर्माता का दावा है कि सब कुछ सामान्य है! यदि वास्तव में सब कुछ सामान्य है तो फिर इतनी पर्देदारी किसलिए? फिल्म पिछले एक साल से रिलीज क्यों नहीं हो पा रही है? ऐन वक्त पर ट्रेलर दिखाकर उस पर लिखने से रोकने की जरूरत क्यों पड़ी? आखिर दर्शकों से क्या छिपाया जा रहा है? देश की आम जनता से क्ष छिपाया जा रहा है?
माना कि यह फिल्म सलमान खान की है.मगर जिस तरह के हालात एक साल के दौरान बने हैं, उसके चलते सवालों के घेरे में महज सलमान खान या उनकी फिल्म नहीं है.सवाल देश की सरकार का भी है. गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प हुई थी. हमारे 20 जवान शहीद हुए थे.देश ने अपने जवानों की शहादत देखी थी. उस घटना के बाद चीन के साथ रिश्तों को लेकर सरकार ने क्या किया, क्या बातचीत हुई, सीमा पर क्या स्थिति बनी और दोनों देशों के बीच क्या समझौते हुए, इन सब पर देश को सच जानने का पूरा हक है.
यॅूं तो सरकार हर मंच से कहती आ रही है कि देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और भारतीय सेना किसी भी चुनौती का जवाब देने में सक्षम है. फिर गलवान की घटना पर आधारित एक फिल्म को लेकर इतनी बेचैनी क्यों? क्या चीन के एतराज के सामने हमारी अभिव्यक्ति की आजादी भी कमजोर पड़ जाती है? क्या अब चीन यह तय करेगा कि किस तरह क भारतीय सिनेमा बने? भारत में उसकी सेना के बारे में क्या दिखाया जाए और क्या नहीं?
होना तो यह चाहिए कि यदि चीन को सलमान खान फिल्म से परेशानी है तो उसे होने दिया जाए.लोकतांत्रिक देष भारत में हर फिल्मकार को अपने विवेक से फिल्म बनाने की रचनात्मक स्वतंत्रता होनी चाहिए.चीन ने अपनी बात रख दी. लेकिन भारत सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने देश के नागरिकों को सच जानने दे.अपने देश के नागरिकों के हित के बारे में सोचे. सरकार को यह बताना चाहिए कि फिल्म के मामले में रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की क्या भूमिका रही. क्या वास्तव में कोई आपत्ति थी? अगर थी तो किस बात पर? और अगर नहीं थी तो फिर फिल्म के साथ एक साल से यह सब क्यों होता रहा?
गलवान में शहीद हुए जवान किसी फिल्मी कहानी के किरदार नहीं थे. वह हमारे देश के बेटे थे. उनके परिवारों ने अपने लोगों को खोया है. उनकी बहादुरी पर फिल्म बन रही है तो उसमें सच दिखना चाहिए, न कि किसी की राजनीतिक या कूटनीतिक सुविधा के हिसाब से कहानी को ढालने की कोशिश होनी चाहिए.
देशभक्ति का मतलब सिर्फ यह नहीं कि सरकार जो कहे, उसे ही अंतिम सच मान लिया जाए. देशभक्ति का मतलब यह भी है कि सरकार से सवाल पूछे जाएं…और आज सवाल बहुत सीधा है..गलवान में क्या हुआ था, यह देश जानता है.तो फिर सरकार को उस घटना पर बनी फिल्म से आखिर डर किस बात का है?
क्या चीन को नाराज करने का डर इतना बड़ा है कि अपने ही शहीदों की कहानी दिखाने में हमें बार-बार सोचना पड़े? अगर ऐसा नहीं है तो सरकार सामने आए और देश को बताए कि सलमान खान की फिल्म ‘मातृभूमि’ के साथ आखिर यह सब क्यों हुआ..अगर सलमान खान ने अपनी इस फिल्म में कुछ गलत दिखाने का प्रयास कर रहे हैं, तो वह भी लोगो के सामने आना ही चाहिए…
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ‘बैटल आफ गलवान’ सिर्फ एक फिल्म का नाम नहीं था.वह हमारे जवानों की शहादत और देश के स्वाभिमान का सवाल है. जिस पर पर्दा डालने का अधिकार किसी को नहीं होना चाहिए. Motherland Movie




