Suspense Story: मंदिर में दिया ने अपनी सास व पंडित धर्मानंद की बात सुनी तो उसे पता चला कि उस का पासपोर्ट धर्मानंद के पास था. यानी वह 3 लोगों की तिकड़ी में फंसी हुई थी. नैंसी के बारे में भी उसे पता चला कि उस से नील के गहरे संबंध थे. फिर वह बलि का बकरा क्यों बनी? नील जरमनी जा रहा था. दिया को उस का सामान तैयार करने का आदेश दिया गया. सासूमां ने अच्छी बनते हुए उसे लंदन घूमने के लिए कहा. आखिर क्यों? दिया का मन पसोपेश में था. अब आगे...

सितारों और भाग्य के नाम पर कुरबान की जा रही दिया पिंजरे से निकलने के लिए रास्ता

ढूंढ़ रही थी. क्या धर्मानंद वह माध्यम हो सकता है?

‘‘अरे, इतना क्या सोच रही हो, नील को जरमनी जाना ही है. तुम धर्मानंदजी के साथ लंदन घूम आओ. तुम्हारा मन भी बहल जाएगा.

‘‘मैं पंडितजी से बात कर लूं न? जब वे जाएंगे तो तुम्हें ले जाएंगे.’’

औक्सफोर्ड की गलियों तक से तो वह अभी तक परिचित हो नहीं पाई थी. सासू मां लंदन घूमने का प्रस्ताव रख रही थीं. उस ने बिना कोई प्रतिक्रिया दिए ‘जैसा आप को ठीक लगे’ कहा और चाय के खाली कप समेट कर उठ गई.

कैसी अजीब औरत है, अपनी पुत्रवधू को किसी और के साथ घूमने भेज सकती है पर अपने बेटे से दूर रखने में बेटेकी भलाई सम?ाती है. अनपेक्षित व्यवहारों की आदी हो चुकी थी दिया. बेकार ही दिमाग लड़ाने से फायदा भी क्या था. चलो, इन धर्मानंदजी को भी देख लिया जाए. शायद इन्हीं के माध्यम से कुछ रास्ता निकल आए. उसे तो पिंजरे से निकलने के लिए रास्ता ढूंढ़ना था.

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