अपनी शर्तों पर जीने वाली भारती घर आए रिश्तों को मीनमेख निकाल कर बड़ी आसानी से ठुकरा देती थी. बेटी के ऐसे व्यवहार से मां अंदर ही अंदर घुली जा रही थीं.
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