Hindi Story: सुबहसुबह परिदों के शोर से मेरी नींद टूटी थी लेकिन मैं ने फिर अपनी आंखें बंद कर ली थीं. सुबहसुबह की ताजगी को अपने भीतर उतार रही थी. आदमकद बड़े शीशों वाली खिड़कियों के परदे मेरे पति  प्रशांत ने हटा दिए थे जिस से शीशों से छन कर सुनहरी धूप पलंग तक पहुंच रही थी. खिड़की से बाहर आसमान को छूती हुई पहाडि़यां थीं. बीचोंबीच नैनीताल. नैनीताल के ठीक सामने वाले पहाड़ पर बना था रेलवे का हौलिडे होम. उस में 48 कमरे थे. मैं और मेरे पति ग्राउंडफ्लोर के रूम में थे. सैकंड फ्लोर पर हमारे पारिवारिक मित्र सपत्नीक रुके थे.

वर्षों से योजना बन रही थी. वर्ष 2023 में योजना पूर्ण हुई, मार्च महीने में. काठगोदाम से घुमावदार सर्पीली सड़कों से हम हौलिडे होम आ गए थे. टैक्सी चला रहा व्यक्ति 40 वर्ष का बातूनी था. वह रास्तेभर बोलता रहा था. मैं और हमारी पारिवारिक मित्र सुषमा पीछे की सीट पर थीं. हम उस से बातें करने के बजाय, बातें सुन रहे थे. हरियाली व पहाडि़यों के बीच गुजरती टैक्सी से बाहर देखने से ज्यादा सुंदर कुछ नहीं था. उसी में खोए थे. टूरिस्टों की भीड़ नैनीताल में वर्षभर रहती है, ऐसा टैक्सी ड्राइवर बता रहा था.

मार्च का मौसम सुहावना होता है लेकिन ठंडक रहती है. हम गरम कपड़े साथ लाए थे. ड्राइवर खूब बातें कर रहा था. बातोंबातों में उस ने बताया था, उस का नाम वाहिद था. वह अपनी पत्नी व 2 बच्चों के साथ एक पहाड़ी पर रहता था. बूढ़े पिता की देखभाल उस की पत्नी करती थी. ज्यादा बारिश में धंधा मंदा हो जाता है क्योंकि पहाडि़यों के होने से दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है. वह बता रहा था कि वह कल सुबह आ जाएगा, पूरा नैनीताल घुमा देगा. रेट भी उचित लेगा. ईमानदारी को वह अपना ईमान समझता है. ऊपर वाले को क्या मुंह दिखाएगा, बेईमानी के पैसों की अपेक्षा वह ईमानदारी की सूखी रोटी पसंद करेगा. जिस समय उस ने हौलिडे होम छोड़ा था, रात के 9 बज रहे थे. इसलिए सुबह ही निकलने की सोची थी.

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