Hindi Story: रजिस्ट्रार के सामने एप्लीकेशनों पर साइन करते समय मां, दोनों भाई, दोनों की पत्नियां, देव के पेरैंट्स, बहन और बाहर कुछ नजदीकी रिश्तेदार थे. भाइयों ने इस शादी पर कुछ आपत्ति की थी पर यह देख कर कि दीदी अब एक पूरी समझदार रोबदार बोर्डिंग स्कूल की प्रोक्टर हैं और अपने अधिकारों से पूरी तरह वाकिफ हैं, चुप से थे. उन्होंने कहना चाहा था कि आप वैसे अपने से नीची जाति के लड़के से विवाह कर सकती हैं पर देव की पर्सनैलिटी और उस के ठाटबाट देख कर चुप रह गए पर चेहरों पर उस हताशा की झलक थी जो किसी सोने की चिडि़या हाथ से निकल जाने पर होती है.
यह 3 साल पहले की बात थी जब स्कूल की कैंटीन में चाय पीते हुए देवयानी ने कहा था, ‘कृष्णा, आज का अखबार देखा? देहरादून के प्रसिद्ध बोर्डिंग स्कूल में जौब के लिए इश्तिहार है. तुम्हारे लिए परफैक्ट रहेगा. तुम्हें अप्लाई करना चाहिए,’
कृष्णा और देवयानी पिछले कई सालों से एक ही स्कूल में काम करती थीं. सहकर्मी होने के साथसाथ दोनों अच्छी सहेलियां भी थीं. एकदूसरे से सुखदुख साझ करतीं और जरूरत पड़ने पर एकदूसरे को सलाह भी दिया करतीं. दोनों वैसे संभ्रांत पढ़ेलिखे घरों से थीं और इस स्कूल में भी नौकरी सिर्फ अच्छे पढ़ेलिखों को दी जाती थी. वे स्मार्ट और चतुर थीं.
‘देवयानी, तुम क्यों मु?ो कहीं और भेजने के लिए इतनी उतावली हो रही हो, अपने घर से दूर जा कर मु?ो क्या खुशी मिलेगी?’
‘कृष्णा, तुम जानती हो कि तुम्हारे जाने से सब से ज्यादा उदास मैं ही होऊंगी. एक तुम ही तो मेरी सब से करीबी दोस्त हो, लेकिन बात यह भी है कि मैं तुम्हारी खुशी चाहती हूं और किस घर की बात कर रही हो? उसी टौक्सिक माहौल से
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