एक दिन न जाने क्यों कुछ मीठा  खाने की इच्छा हो आई. सोचा,  दफ्तर से लौटते हुए कुछ मिठाई लेता जाऊंगा. सब मिल कर खाएंगे. अकेलेअकेले मिठाई खाने का क्या मजा है भला? वैसे भी तो अकसर ही घर लौटते हुए बच्चों के लिए कुछ न कुछ बंधवा ही लेता हूं. कभी केक, पेस्ट्री, चौकलेट तो कभी नमकीन, आज मिठाई ही सही.

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