हम अक्सर देखते हैं कि सबकुछ होने के बाद भी लोग अपनी छोटी-छोटी कमियों को लेकर रोते रहते हैं, दूसरों को सुखी देख कर दुखी रहते हैं, भले अपने पास सबकुछ क्यों न हो उन्हें कभी तृप्ति नहीं होती. ऐसे लोग कभी यह नहीं देखते कि दुनिया में कितने ही लोग हैं जो बेहद अभावों में भी खुशी-खुशी अपनी जिन्दगी जी रहे हैं. मुझे भी इस बात का अहसास उस दिन ही हुआ जब मैंने अपने घर के सामने खेलते उस छोटे से गरीब और गंदे बच्चे से बात की. उस दिन उसकी बातें सुन कर मैं अचम्भित हो गयी. सोचने को मजबूर हो गयी कि वह अपनी गरीबी में भी कैसा खुश था.

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