‘‘हां... हां...’’ सब सम्मिलित स्वर में बोले. ममता ने दोगने उत्साह से बोलना शुरू कर दिया, ‘‘जब गौरव के पापा के साथ मैं इंडिया से बाहर गई थी तो...’’‘‘पर हम तो तब गैस्ट हाउस में ठहरे थे, वहां कैसे सीखा?’’ अरुण ने आश्चर्यचकित हो ममता की बात बीच में ही काट दी.

‘‘आप के काम पर चले जाने के बाद मैं हर रोज गैस्ट हाउस की किचन में पहुंच जाती थी. भाषा तो नहीं जानती थी वहां की, लेकिन खाना बनते देखती रहती थी. फिर इस्तेमाल होने वाली चीजों के नाम इशारे से पूछती तो शेफ भी टूटीफूटी इंग्लिश में बता देते थे.’’

सभी ठहाका लगा कर हंसने लगे. शुभांगी तालियां बाते हुए बोली, ‘‘वाओ मम्मी, क्याक्या सीखा आप ने?’’

‘‘फ्रांस में रंगबिरंगे मैकरोने और जौ के आटे से बनने वाले क्रेप केक... लेबनान में सीखी पीटा ब्रैड बनाने की विधि और चने से बने फलाफल जो उस के अंदर भरे जाते हैं. मुझे बहुत तरह

की सौस और डिप बनानी भी आती हैं, जो आजकल बाजार में तरहतरह के नामों से खूब महंगी बिकती हैं.’’

‘‘दादी, क्या कह रही हो आप, मैं अपने फ्रैंड्स को बताऊंगा न ये बातें तो आप के हाथ की बनी चीजें खाने की जिद करने लगेंगे.’’ विदित के चेहरे पर आश्चर्य और उल्लास के भाव एकसाथ तैरने लगे.

‘‘तो आप ये डिशेस बना कर यूट्यूब पर डालो न. पापा बनाएंगे आप का वीडियो,’’ गौरव चहकते हुए बोला.

‘‘भई इस बहाने हमें भी रोजरोज अच्छा खाना मिला करेगा,’’ अरुण खिलखिला कर हंस दिया.

घर के सभी लोग उत्सव सरीखे वातावरण में भीग रहे थे. अगले दिन विदित दादाजी को

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