किसी महान बल्लेबाज की एक निशानी यह होती है कि वह इतनी आसानी से खेल पर हावी हो जाता है कि विपक्षी टीम चाह कर भी कुछ नहीं कर पाती. विराट कोहली ऐसे ही बल्लेबाज का नाम है.

वैसे तो क्रिकेट बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग का ‘गोल्डन ट्रायंगल’ कहा जाता है पर मशहूरी की सारी मलाई ज्यादातर बल्लेबाज ही चखते आए हैं और हाल ही में यह मलाई विराट के हिस्से में आई है.

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने अपने नाम एक और यादगार रिकौर्ड दर्ज कर लिया है. उन्होंने वनडे इंटरनैशनल मैचों में सब से कम पारियों में 10 हजार रन पूरे करने वाले बल्लेबाज का तमगा हासिल कर लिया है. इस के साथ ही उन्होंने क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाजों में से एक सचिन तेंदुलकर के 17 साल पुराने वर्ल्ड रिकौर्ड को तोड़ दिया है.

बुधवार, 24 अक्टूबर, 2108 को वेस्टइंडीज के साथ खेले गए दूसरे वनडे मैच से पहले विराट कोहली के नाम 212 मैचों की 204 पारियों में 9919 रन थे. उन्हें इस रिकौर्ड तक पहुंचने के लिए 81 रनों की जरूरत थी जिसे उन्होंने अपने ही स्टाइल में हासिल किया. हां, उन्हें इस बात का मलाल जरूर रहेगा कि वेस्टइंडीज की नौसिखिया टीम के बल्लेबाजों ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए इस मैच को आखिरी गेंद पर टाई करा दिया जिस से 10000 रन और 37वीं सेंचुरी बनाने का उन का जश्न थोड़ा फीका पड़ गया.

विराट कोहली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ विशाखापत्तनम में हुए मैच के दौरान पारी के 37वें ओवर में एश्ले नर्स की गेंद पर यह मुकाम हासिल किया.

विराट कोहली ने सिर्फ 205 पारियों में 10 हजार रन पूरे कर लिए जबकि सचिन तेंदुलकर ने 31 मार्च, 2001 को 259 पारियों में 10 हजार रन पूरे किए थे यानी विराट ने सचिन से 54 पारियां कम खेली हैं.

विराट कोहली के इस कारनामे पर सचिन ने ट्वीट कर उन्हें बधाई दी और आगे भी इसी तरह खेलने की शुभकामनाएं दी हैं. सब से कम पारियों में 10 हजार रन पूरे करने में तीसरे पायदान पर भारत के ही कप्तान रह चुके सौरभ गांगुली हैं, जिन्होंने 263 पारियों में 10000 रनों का आंकड़ा छुआ था.

यहां यह बता दें कि 18 अगस्त, 2008 को श्रीलंका के खिलाफ अपने वनडे कैरियर की शुरुआत करने वाले कोहली विराट कोहली ने जनवरी, 2017 में लिमिटिड ओवरों के मैचों में कप्तानी संभाली थी.

यह रहेगा मलाल

विराट कोहली को इंटरनेशनल क्रिकेट मैच खेलते हुए तकरीबन 10 साल हो गए हैं. इतने सालों में इस खेल में बहुत ज्यादा बदलाव आया है. लिमिटेड ओवरों के मैचों का क्रेज बढ़ा है. 50 ओवरों के वनडे मैचों को भी अब बोरिंग माना जाता है.

क्रिकेट में लोगों की दिलचस्पी बनाए रखने के लिए टी 20 मैचों को खूब बढ़ावा दिया जाता है. इंडियन प्रीमियर लीग जैसा प्राइवेट टूर्नामेंट छा गया है. इस से सब से ज्यादा नुकसान गेंदबाजों को झेलना पड़ा है. खासकर तेज गेंदबाजों का तो मानो अकाल पड़ गया है.

सचिन तेंदुलकर के समय में दुनिया की हर टीम में खतरनाक गेंदबाजों की तिकड़ी या जोड़ा हुआ करता था जो अच्छे से अच्छे बल्लेबाज की भी अग्निपरीक्षा ले लेते थे. आज किसी से पूछा जाए तो दिमाग पर जोर दे कर भी नहीं बता पाएगा कि फलां टीम का फलां तेज गेंदबाज दुनिया के अच्छे से अच्छे बल्लेबाजों को नाको चने चबवा देता है. सचिन तेंदुलकर के समय के वसीम अकरम, वकार यूनुस, शोएब अख्तर, चामिंडा वास्, मुथैया मुरलीधरन, ग्लेन मैक्ग्रा, ब्रेट ली, एलन डोनाल्ड, शौन पोलाक जैसे गेंदबाज अब ढूंढे नहीं मिलते हैं.

अब कोई शेन वार्न यह नहीं कहता कि सचिन तेंदुलकर उन के सपने में आ कर उन्हें अपनी बल्लेबाजी से डराते हैं. गलती से अगर कोई गेंदबाज आ भी जाता है तो फिटनेस के चलते वह ज्यादा समय तक टिक नहीं पाता है.

विराट कोहली की बल्लेबाजी के हुनर पर कोई शक नहीं है पर उन्होंने कभी ऐसे गेंदबाजों का सामना नहीं किया है जिन्होंने क्रिकेट जगत में अपनी रफ़्तार से खौफ पैदा किया था या अपनी फिरकी पर सब को नचाया था. अगर ऐसा हो पाता तो खुद विराट अपने आप पर फख्र महसूस करते.

बहरहाल, विराट कोहली ने वनडे मैचों में सब से तेज 10000 रन बना कर एक मील का पत्थर छुआ है जो अपने आप में मिसाल है.

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