पूरी दुनिया रंगभेद और नस्लभेद की समस्या से जूझ रही है. विज्ञान और तकनीक ने दुनिया को कहां से कहां पहुंचा दिया है पर नस्लभेद के मामले में हम वहीं खड़े हैं. क्रिकेट या अन्य खेलों की बात करें तो इस का लंबा इतिहास रहा है. रूसी दर्शकों का काली चमड़ी वाले खिलाडि़यों के प्रति बुरा रवैया रहा है. ऐसे में रूस में अगले साल होने वाली विश्वकप फुटबौल प्रतियोगिता क्या नस्लभेदी टिप्पणियों से ऊपर उठ पाएगी, यह बड़ा सवाल है.

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