कल तक वेस्टइंडीज के खिलाफ भारतीय क्रिकेट टीम पर विवाद हो रहा था कि सीनियर खिलाड़ियों की अनदेखी कर क्यों नए खिलाड़ियों को चुना गया? क्या वेस्टइंडीज की टीम इतनी कमजोर है कि ऐसा फैसला लिया जाए? क्योंकि अगर मेहमान टीम अगर कहीं मेजबानों पर भारी पड़ गई तो क्रिकेट की दुनिया में भारत की किरकिरी हो जाएगी.

लेकिन राजकोट में खेले गए अपने पहले टेस्ट मैच में शतक जड़ कर 18 साल के पृथ्वी शौ ने साबित कर दिया कि उन्हें टीम में चुन कर चयनकर्ताओं ने कोई गलती नहीं की है.

पृथ्वी शौ डेब्यू टेस्ट में शतक लगाने वाले सब से युवा भारतीय क्रिकेटर बन गए हैं. पर यह कोई तुक्का नहीं था क्योंकि इस ‘नन्हें जादूगर’ ने पहले भी अपनी कलाइयों की जादूगरी दिखा रखी है.

पृथ्वी शौ बचपन में ही यह साबित कर चुके थे कि वे भविष्य में क्रिकेट की दुनिया में लंबी रेस का घोड़ा बनेंगे. महज 4 साल की उम्र में अपनी मां को खो देने वाले पृथ्वी शौ को उन के पिता पंकज शौ ने अकेले ही पाला. क्रिकेट में उनके हुनर को पहचान कर पंकज शौ ने अपनी जिंदगी का सब से बड़ा दांव खेला और अपने बेटे को बेहतरीन खिलाड़ी बनाने के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया. पृथ्वी को बल्लेबाज बनाने के लिए उन्होंने खुद उन का गेंदबाज बनने में भी कोई झिझक महसूस नहीं की.

पिता की मेहनत का ही नतीजा था कि स्कूल क्रिकेट से ले कर अब तक पृथ्वी शौ ने शानदार प्रदर्शन किया है. उन्होंने रणजी ट्रौफी और दिलीप ट्रौफी में कई रिकौर्ड अपने नाम किए. दिलीप ट्रौफी में शतक लगाने वाले वे सब से युवा बल्लेबाज थे. इस से पहले यह रिकौर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम था. पृथ्वी ने आईपीएल में भी धमाकेदार शुरुआत की थी.

राजकोट में अपने पहले टेस्ट मैच में 134 रन बना कर पृथ्वी शौ ने साबित कर दिया है कि वे सिर्फ क्रिकेट खेलने के लिए ही बने हैं और आने वाले समय में अपने उम्दा खेल से क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे.

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