Romantic Story in Hindi : किशोरावस्था में मोनिका और समय के नादान दिलों ने पहले स्पर्श का जो एहसास किया था वह आज युवावस्था में भी उन को भीतर तक तरंगित कर जाता था. क्या दोनों दोबारा उस एहसास को जी पाए?
‘‘आंटी, आंटी, समय भैया और मोनिका दीदी इतने बड़े हो गए, फिर भी कपड़े उतार कर गैराज वाले कमरे में चारपाई पर लेटे हैं. मेरी मम्मी तो कहती है कि मैं बड़ी हो गई हूं, मुझे किसी के सामने ऐसे कपड़े नहीं उतारने चाहिए. आप उन्हें डांटो चल कर.’’
ऋतु हतप्रभ थी पड़ोस की बच्ची, जो अभी 5 साल की थी, की बात सुन कर. उस का मन आशंकाओं में डूबनेउतरने लगा. अप्रत्याशित बात सुन कर कांप गई वह.
ऋतु और पूजा नंदभाभी थीं. ऋतु की भाभी पूजा की घनिष्ठ मित्र शीला का बेटा समय था. ऋतु की बेटी मोनिका थी. हरिद्वार में पूजा रहती थी और ऋतु का घर रुड़की में था. पूजा और मोनिका भले ही नंदभाभी थीं लेकिन दोनों में दोस्ताना व्यवहार ही था. ऋतु के घर तीज का फंक्शन था, उस की भाभी पूजा और उन की मित्र शीला नाचगाने में निपुण थीं तो ऋतु ने स्पैशली आने के लिए कहा था.
समय और मोनिका एक ही क्लास में पढ़ते थे. मोनिका की मामी की दोस्त का बेटा समय अकसर आता रहता था. तीज का त्योहार हो या कोई अन्य फंक्शन, समय की मम्मी को भी स्पैशल इन्विटेशन जाता था क्योंकि नाचनेगाने और ढोलक बजाने के कारण महिला मंडली की प्रिय थीं वे. उन का मधुर स्वर इतना कर्णप्रिय था कि कोई भी सुनता तो मंत्रमुग्घ हुए बिना न रहता. इत्तफाक से समय और मोनिका एक ही स्कूल में साथ पढ़ते भी थे. समय जब भी आता तो दोनों में खूब गप्पें होतीं, पढ़ाई के साथ अन्य विषयों पर भी खूब चर्चा होती. आज भी मम्मी के साथ समय आया था क्योंकि मोनिका की मम्मी ऋतु ने अपनी भाभी पूजा से कहा था, ‘भाभी, आप को आना है, साथ में शीला भाभी को भी लाना है. मेरी सारी सहेलियां आप की और शीला भाभी की फैन हैं.’
‘‘लेकिन ऋतु, इस समय तो स्कूल में पेपर चल रहे हैं, मेरा आना मुश्किल है.’’
‘‘अच्छा, मैं इतवार को रख लेती हूं, अब तो ठीक है न भाभी.’’
पीछे से मोनिका चिल्ला कर बोली, ‘‘आंटी, समय को भी साथ लाइएगा.’’
इस बात पर ऋतु ने हंसते हुए कहा तो पूजा ने यह सोच कर हां कर दी कि उसी दिन जा कर वापस आ जाएगी. उस ने अपनी प्रिय मित्र शीला को भी साथ ले लिया. शीला ने बेटे समय को भी साथ ले लिया. लौटने में रात हो जाएगी तो समय साथ होगा तो अच्छा रहेगा. समय को भी ऋतु के यहां अच्छा लगता था. हमउम्र मोनिका उस की मित्र थी. दोनों बचपन से लड़तेझगड़ते किशोरवय की उम्र पर आ पहुंचे थे. 15 साल की मोनिका और समय 16 साल का था. दोनों बच्चों को इस तीज के फंक्शन में कोई भी इंट्रैस्ट नहीं था.
‘‘चलो न समय, बाहर वाले कमरे में चलते हैं, यहां तो इन लोगों के गानेबजाने में हम बात ही नहीं कर पाएंगे.’’
मोनिका ने समय का हाथ पकड़ा और लौबी से बाहर कमरे में चल दिए. समय को भी इस तीज पार्टी में कुछ खास नहीं लग रहा था. वह तो केवल यह सोच कर मम्मी के साथ आ गया था कि कुछ समय मोनिका के साथ गप्पें लड़ाएगा. वैसे भी, इस टीन ऐज में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण कुछ अधिक ही होता है.
‘‘और बता समय, तेरी क्लास में क्या चल रहा है? सुना है वंश अपने मम्मीपापा के साथ मुंबई शिफ्ट हो रहा है?’’
क्योंकि तीज पार्टी में बहुत सारी महिलाएं थीं, ढोलक के साथ नाचने व आपस में हंसीमजाक से बहुत शोर हो रहा था, सो, समय ने मोनिका से कहा, ‘‘अरे मोनिका, तेरे घर में कोई ऐसी जगह नहीं है जहां आंटियों की तेज आवाजें न सुनाई दें क्योंकि मुझे तेरी बात भी समझ नहीं आ रही.’’
‘‘हां, हां, चल, एक बाहर गैराज वाला कमरा है जिस का रास्ता भी बाहर की तरफ से है. वहीं चलते हैं.’’
गैराज वाले कमरे में पंहुच कर समय बोला, ‘‘यार मोनिका, यहां तो सिर्फ यह चारपाई है पुराने जमाने की, बैठेंगे कैसे?’’
मोनिका ने समय का हाथ खींचा और उसी चारपाई पर धकेल दिया पर खुद को संभाल नहीं पाई और समय के ऊपर जा गिरी.
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