CBSE Controversy : सीबीएसई का जन्म ब्रिटिशकाल में हुआ था जिस का कायाकल्प आजादी के बाद हुआ कहने को सिर्फ नाम बदला लेकिन उस की कार्यशैली ब्रिटिश हुकूमत की तरह पौराणिक सी ही रही. इस ने जिस भेदभाव को जन्म दिया अब वह विकराल रूप धारण कर चुका है. औन स्क्रीन मार्किंग के बहाने नजर डालें उस हकीकत पर जो आमतौर पर नंगी आंखों से नजर नहीं आती.

क्यों पढ़ें?

फूट डालो और राज करो की नीति

सीबीएसई की आन मार्किंग व्यवस्था यह जता गई कि उसकी कार्यशैली शुरू से ही ब्रिटिस हुकुमत के प्रभाव में रही है. 'फूट डालो और राज करो' का मन्त्र परीक्षा और पढ़ाई में कैसे सीबीएसई चला रही है, इसे समझना जरुरी है कि अब नारा है- 'फूट डालो और वर्ण व्यवस्था की नई शक्ल कायम रखो.'

अपने नएनए लेकिन अधिकतर गैरजरूरी प्रयोगों के लिए चर्चा, आलोचना और विवादों में रहने वाले सीबीएसई ने नया शिगूफा इस साल औनस्क्रीन मार्किंग का छेड़ा है. 12वीं क्लास में इस साल औनस्क्रीन मार्किंग की तुक क्या है यह किसी को समझ नहीं आ रहा है. इस प्रक्रिया के तहत सभी आंसर शीट्स की स्कैनिंग परीक्षा केंद्र पर ही होगी.

इस साल 12वीं के इम्तहान में 18 लाख 59 हजार से भी ज्यादा छात्र शामिल हो रहे हैं. जिन की एक करोड़ से भी ज्यादा आंसर शीट के 32 करोड़ से भी ज्यादा पेज स्केन किए जाएंगे स्कैनिंग कैसे होगी और इसे कौन यानी किस तरह के कर्मचारी करेंगे यह बहुत जल्द साफ हो जाना है.

CBSE Controversy (01)
डिजिटल मार्किंग का सीबीएसई का नया शिगूफा टैक्निकल टोटका भी साबित नहीं हो रहा. इस से छात्रों को कोई फायदा नहीं होने वाला.

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