Romantic Story in Hindi :
अन्वी के बदलते रंगढंग देख कर रंजनी समझ गई थी कि उस की बहन पर इश्क का खुमार चढ़ गया है. खैर, यह उम्र ही ऐसी होती है. लेकिन रंजनी नहीं चाहती थी कि अन्वी अपने कैरियर को ताक पर रख दे, इश्क के चक्कर में पड़ कर. पर अन्वी के निर्णय ने तो रंजनी को हैरत में डाल दिया था.
ट्रिनट्रिनट्रिन. डोरबेल की आवाज सुनते ही अन्वी ने दरवाजा खोला और हड़बड़ाई सी अपनी दीदी रंजनी से बोली, ‘‘प्लीज दीदी, मुझे डिस्टर्ब मत करना. मैं एक जरूरी कौल पर हूं.’’
रंजनी के चेहरे पर मुसकान छा गई थी, क्योंकि पहले वह भी तो जिंदगी के इन अनुभवों से गुजर चुकी थी. वह ऐसे कौल्स की असलियत को अच्छी तरह जानती थी.
‘‘ओके माई डियर,’’ कहते हुए पास में रखी ‘गृहशोभा’ पत्रिका के पेज पलटने लगी थी लेकिन उस का ध्यान अन्वी पर ही अटका हुआ था.
19 वर्षीया अन्वी रंजनी की छोटी बहन है. उन के मम्मीपापा यूपी के कासगंज जैसे छोटे शहर में रहते हैं. वहां कोचिंग या पढ़ाई की अच्छी सुविधा नहीं है, इसलिए रंजनी ने अपने मम्मीपापा से जिद कर के उस को अपने पास दिल्ली जैसे शहर में रखा हुआ है. रंजनी अपनी छोटी बहन की हर हरकत पर अपनी काग दृष्टि लगाए रखती है क्योंकि वह थोड़ी चुलबुली सी आधुनिका है. उस के हर कदम पर वह पूरी निगरानी रखती है.
यदि कुछ गड़बड़ हो गई तो आखिर मम्मीपापा को उसी को तो जवाब देना होगा क्योंकि वही तो अन्वी को जिद कर के अपने साथ रहने के लिए ले कर आई थी. जबकि, निखिल उस के पति, के चेहरे पर नाराजगी स्पष्ट झलक रही थी.
अन्वी बचपन से पढ़ने में बहुत तेज थी. उस का सपना था कि वह सीए बने.
इसलिए मम्मीपापा ने उस के भरोसे और विश्वास पर ही अन्वी को उन लोगों के पास रहने के लिए भेजा था जबकि पापा तो उसे होस्टल में रखना चाहते थे.
अन्वी को उस के पेरैंट्स ने उसे पूरी छूट दे रखी थी कि वह अपना मनचाहा कैरियर चुन सकती है.
अन्वी ने सीए बनना चाहा और उस की एंट्रैंस की परीक्षा पास भी कर चुकी थी.
वैसे, दोनों बहनों के बीच आपस में बहुत अच्छी समझदारी थी. अन्वी कालेज से लौट कर आते ही अपने दोस्तों की सारी बातें रंजनी को बताया करती थी.
रंजनी की ओर से भी किसी भी दोस्त के घर आनेजाने पर कोई मनाही या प्रतिबंध नहीं था. जब दोस्तों का ग्रुप घर आता तो हर बार रंजनी अपनी ओर से यह जानने की कोशिश किया करती कि अन्वी का विशेष ध्यान किस लड़के पर है. वह उसे छेड़ती हुई कहती भी कि अन्वी तुम्हें इन सब में कौन सब से अच्छा लगता है तो वह अपनी दी को प्यार से घूर कर हंस दिया करती.
‘दीदी, मेरी जासूसी करने की कोई जरूरत नहीं है. वैसे, आप को बता देती हूं कि जैसा आप सोच रही हैं, वैसा कुछ भी नहीं है. अभी मुझे अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना है. प्यारव्यार के लिए अभी सारी उम्र पड़ी है.’
सीए का एंट्रैंस पास करने के बाद अन्वी फाइनल ग्रुप की तैयारी में जुटी हुई थी लेकिन लगभग सालभर बाद ही अन्वी के व्यवहार में आया बदलाव दोस्त जैसी बहन की आंखों से भला कैसे छिपता.
अब अन्वी के हाथों से फोन नहीं छूटता और वह अपने कमरे में बैठ कर फोन पर बहुत धीमेधीमे लंबीलंबी बातें किया करती. पहले तो उस का फोन कहीं भी पड़ा रहा करता था लेकिन अब वह अपना फोन अपने आसपास रखती और थोड़ीथोड़ी देर में अपना फोन चैक करती रहती थी. रंजनी ने अपनी छोटी बहन के इस नए बदलाव को नोटिस किया और समझ गई कि जरूर किसी लड़के के साथ इस का कुछ चक्कर शुरू हो गया है.
रंजनी को आजकल अन्वी को औब्जर्व करने में बहुत मजा आ रहा था. उसे अपने कालेज के दिनों की याद आती जब उस का और निखिल का अफेयर शुरू हुआ था तो वह भी ऐसे ही मैसेज की आवाज होते ही मैसेज को पढ़ने के लिए बेचैन हो जाया करती थी और तब तो वह मां से छिप कर मैसेज टाइप करती थी. कितने रूमानी दिन थे. हर समय, बस, रोमांस ही छाया रहा करता था. उस ने नोट किया था कि अब जब भी वह किसी काम के लिए अन्वी को फोन करती थी तो वह हमेशा जल्दी में रहती और तुरंत बात कर के फोन कट कर दिया करती थी.
रंजनी ने पति निखिल को अन्वी में आए इस परिवर्तन को बताने की जरूरत नहीं समझ थी क्योंकि निखिल अपने काम में बहुत बिजी रहते थे.
एक दिन जब अन्वी अपना फोन ले कर नहाने के लिए बाथरूम में जा रही थी तो वह जोर से हंस कर बोली थी, ‘‘आज फोन को भी नहलाने के लिए ले जा रही है क्या?’’
‘‘दी, तुम बहुत खराब हो. हर घड़ी मुझ पर नजर रखती हैं आप. म्यूजिक सुनने के लिए साथ में ले जा रही हूं.’’
रंजनी मुसकरा पड़ी थी. उस ने गौर किया था कि जब वह किचन में बिजी रहती तब अन्वी का फोन जरूर बजा करता था.
वह भी जानबूझ कर उस समय अन्वी के कमरे में जरूर जाती तो रंजनी को देखते ही वह अलर्ट सी हो कर चुप हो जाती थी.
रंजनी को यह तो समझ में आ गया कि अन्वी इन दिनों किसी ऐसे लड़के से बात कर रही है जो उस के परिचित दोस्तों से अलग है. कोई ऐसा नया दोस्त है जिस के बारे में उस ने अभी तक उन्हें बताने की या तो जरूरत नहीं समझ या उन से छिपाना चाहती है.
अब तो उसे अन्वी को देखने में बहुत आनंद आ रहा था. इन दिनों वह ऐसा महसूस करती कि मानो वह अपनी किशोरवय में जी रही हो. जब इसी तरह वह कालेज के दिनों में निखिल के प्यार में पड़ कर ऐसी ही हरकतें करती थी.
वह अन्वी के चेहरे के भावों को देख मन ही मन खूब हंसती. वाह अन्वी, तुम अपने को बहुत सयानी समझने लगी हो लेकिन अन्वी तुम डालडाल तो मैं पातपात. आखिर एक दिन दरवाजे की ओट से उधर से आने वाली आवाज को सुन कर यह तो कन्फर्म हो गया कि अन्वी किसी लड़के से ही बातें करती रहती है.
एक दिन अन्वी ने अपना फोन चार्ज करने के लिए किचन में लगा दिया और वह अंदर तैयार होने के लिए चली गई. तभी फोन की घंटी बजी तो तुरंत रंजनी ने फोन पर निगाह डाली, ‘माई हैंडसम’ के नाम से नंबर सेव था.
आज तो चोरी पकड़ी गई अन्वी की. फिर जरा ही देर में व्हाट्सऐप कौल भी आ गई तो जनाब की फोटो भी दिख गई. रंजनी ने ध्यान से देखा, लड़का तो स्मार्ट दिखाई पड़ रहा है. चलो अन्वी ने लड़का तो अच्छा ही पसंद किया है.
तभी अंदर से दौड़तीभागती घबराई हुई सी अन्वी आई और बोली, ‘‘दी. मेरा फोन बजा क्या?’’
‘‘हांहां, बजा तो था.’’
‘‘किस का फोन था?’’
अन्वी कन्फर्म करना चाह रही थी कि दीदी को कुछ पता तो नहीं चल गया. अन्वी बालों पर ब्रश करती हुई खड़ी थी, चार्जर निकालते हुए प्रश्नवाचक निगाहों से दीदी की ओर देख रही थी.
रंजनी ने अपने को बिजी दिखाते हुए कहा, ‘‘पता नहीं किस का फोन था?’’
‘‘तुम्हारा और तुम्हारे जीजू का टिफिन पैक करने की जल्दी होती है, उस समय भला फोन देखने और उठाने का कब होश रहता है.’’
अन्वी के चेहरे से तनाव की परछाईं उतर गई और वह सामान्य स्वर में बोली, ‘‘हां दी, मुझे पता है कि सुबह आप पर कितना काम का लोड रहता है.’’ अन्वी हंस कर बोली, ‘‘थैंक्यू माई डियर दी.’’ और प्यार से दी को हग कर के किचन से चली गई.
अब रंजनी को चिंता होने लगी क्योंकि उस ने अभी तक निखिल को कुछ नहीं बताया था. वैसे, सच तो यह है कि यदि अन्वी के जीवन में कोई लड़का आया भी है तो इस में खास बात भला क्या है? यह उम्र ही ऐसी है जब लोग प्यार के चक्कर में पड़ते ही हैं. इस में बुराई वाली भला क्या बात है. आखिर, उस ने और निखिल ने भी तो लवमैरिज ही की है. इस उम्र में प्यार में ऐसा नशा सा छाया रहता है जैसे सावन के अंधे को सबकुछ हराहरा ही दिखता है. वैसे भी प्यार में सबकुछ और सतरंगा और हसीन सा ही दिखता रहता है. अपने रूमानी दिनों को याद कर के रंजनी के चेहरे पर भी मुसकराहट आ गई थी.
यदि अन्वी को कोई लड़का पसंद है तो अच्छा तो है, हम सभी लड़का ढूढ़ने की जहमत से बच जाएंगे. इस उम्र में प्यार नहीं होगा तो बताओ कब होगा? रात को जब वह बैड पर गई तो उस के चेहरे की मुसकान रोज से कुछ खास महसूस हुई तो निखिल ने पूछा, ‘‘कोई खास बात है क्या? आज चेहरे पर इतनी बड़ी वाली खिली हुई मुसकान का राज क्या है?’’
‘‘हांहां, है तो कुछ खास बात लेकिन तुम अनुमान लगाओ.’’
‘‘मैं भला कब तुम महिलाओं के मन की बात जान सका हूं. तुम्हीं बता दो, मुझे नींद आ रही है,’’ जम्हाई लेते हुए निखिल बोले.
‘‘तुम्हारी प्यारी साली को शायद इश्क हो गया है.’’
निखिल चौंक पड़ा और बैड पर ही उठ कर बैठ गया था.
वे पहले तो थोड़ा सकपकाए, फिर बोले, ‘‘तुम बहुत ज्यादा खुश हो कर बता रही हो, उस ने तुम्हें बताया कि तुम केवल हवा में अंदाजा लगा रही हो.’’
‘‘उस ने बताया कहां?’’ उस की हरकतों को देख कर अंदाजा लगा रही हूं.’’
‘‘अच्छा, फिर उस के बताने का इंतजार करो.’’ निखिल बोले.
‘‘वैसे, मेरा अंदाजा बिलकुल पक्का है.’’
‘‘वेट ऐंड वाच, अब सो जाओ.’’
परंतु जैसा वे दोनों सोच रहे थे, वैसा नहीं हुआ और एक शाम अन्वी बोली, ‘‘दीदी और जीजू, कल संडे को मेरा एक फ्रैंड आप लोगों से मिलने के लिए आएगा. कल आप लोगों का कोई बाहर जाने का प्रोग्राम हो तो मैं उसे सुबहसुबह ब्रेकफास्ट पर बुला लूंगी.’’
रंजनी ने निखिल को आंखों ही आंखों में इशारा किया कि देख लो, मेरा अंदाजा सही निकला.
निखिल ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘साली साहिबा, ऐसा लग रहा है कि कोई खासमखास आ रहा है. यदि कोई स्पैशल हो तो मैं सूट पहन लूं और टाई लगा कर जैंटलमैन बन कर तैयार हो जाऊं.’’
जीजासाली के बीच चुहलबाजी चल ही रही थी कि रंजनी कौफी ले कर आ गई. प्याला रखते हुए वह हंस कर बोली, ‘‘कोई स्पैशल आ रहा है तो बता दो. मैं भी स्पैशल लंच की तैयारी करवा लूं.’’
‘‘और हां अन्वी, कहो तो मम्मीपापा को भी आने के लिए बोल दूं.’’
‘‘ओह दी, आप भी,’’ कह कर अन्वी उस से लिपट गई थी.
‘‘रिषभ मेरे साथ ही सीए कर रहा है. बस, क्लास में मिलतेमिलाते हम लोगों में दोस्ती हो गई. मैं ने सोचा कि उसे आप लोगों से मिलवा दूं.’’
‘‘जरूरजरूर, भला क्यों न मिलेंगे. कल लंच पर बुला लो.’’
तभी उस का मोबाइल बज उठा तो उसे फोन ले कर अंदर जाते देख कर वह धीमे से मुसकरा कर बोली, ‘‘माई हैंडसम का ही फोन होगा.
‘‘ऐसे ही तो मैं भी तो तुम्हारा नाम देखते ही फोन ले कर अंदर भाग जाती थी.’’
निखिल भी मुसकरा कर बोला, ‘‘यह इश्क भी क्या चीज है, बिलकुल पागल बना देता है.’’
दोपहर में रिषभ आया. वह तो माई हैंडसम की फोटो पहले ही देख चुकी थी. थोड़ी देर में ही वह निखिल और रंजनी से घुलमिल कर बातें करने लगा. ऐसा लगा ही नहीं कि वह पहली बार मिल रहा है. वह बोला, ‘‘दी, मेरी मौम को अपनी सोशल लाइफ से बिलकुल फुरसत नहीं रहती.
‘‘हमारे घर में किसी को पता नहीं होता कि मौम कब घर में आएंगी और कब जाएंगी. पापा को अपने बिजनैस से फुरसत नहीं रहती. वैसे, सच बताऊं तो वे भी दोस्तीयारी में ज्यादा रहते हैं. बिजनैस तो चाचाजी और स्टाफ के भरोसे ही चल रहा है.’’
‘‘मेरी छोटी बहन रिनी अपनी दुनिया में मस्त रहती है. वैसे, वह इंजीनियर है, बेंगलुरु में जौब कर रही है और किसी के साथ लिवइन में रह रही है.’’
रंजनी और निखिल रिषभ की साफगोई देख कुछ समझ नहीं पा रहे थे जबकि अन्वी की नजरों में अपने प्यार के प्रति दीवानापन साफ झलक रहा था.
वह लंच की बहुत तारीफ कर के चला गया लेकिन वह उत्कंठाभरी नजरों से अन्वी को निहार रहा था कि वह परीक्षा में पास हो पाया या नहीं.
रिषभ के जाते ही अन्वी रंजनी के गले से लग कर बोली, ‘‘दी, रिषभ आप लोगों को कैसा लगा?’’
‘‘ठीक ही है, तुम्हें पसंद है तो फिर हम लोगों को भला क्यों नहीं पसंद होगा.’’
‘‘दीदी, मम्मीपापा को बुला लो. मैं चाहती हूं कि वे लोग रिषभ की फैमिली से एक बार मिल कर बात कर लें.’’
‘‘क्यों?’’ रंजनी बोली.
‘‘मैं रिषभ के साथ शादी करना चाहती हूं.’’
अन्वी की बात सुनते ही दोनों को जोर का झटका लगा था.
‘‘ऐसी भी क्या जल्दी है. अभी फाइनल की तैयारी करने के लिए पढ़ाई करने का समय है और तुम शादी की बात कर रही हो.’’
निखिल भी चुप नहीं रह सके थे. ‘‘ऐसी भी क्या आफत आई है. अभी शादी की उम्र थोड़े ही निकली जा रही है. तुम अभी केवल 21 साल की हो. यह उम्र भला शादी की होती है. दिमाग खराब है क्या?’’
‘‘दी, आप समझती क्यों नहीं? प्लीज, पढ़ाई तो हम दोनों साथ में रह कर ज्यादा अच्छी तरह कर लेंगे. आप लोग जानते ही हैं कि मैं अपने कैरियर के लिए कितनी सीरियस हूं.’’
निखिल नाराजगीभरे स्वर में बोले, ‘‘कितनी सीरियस हो, सब दिखाई पड़ रहा है. अभी चुपचाप पढ़ाई में मन लगाओ, शादी के लिए अभी बहुत समय है.’’
‘‘लेकिन जीजू, रिषभ जल्दी शादी करना चाहता है और मैं भी,’’ उस ने शरमा कर अपनी आंखें झांका लीं, फिर तुरंत बोली, ‘‘आप समझने की कोशिश करिए. उस की अट्रैक्टिव पर्सनैलिटी, उस के मस्तीभरे अंदाज और स्मार्टनैस के कारण बहुत सारी लड़कियां उस की दीवानी हैं. यदि किसी ने मुझ से पहले उस को अपनी बातों में फंसा लिया तो मैं तो हाथ मलती रह जाऊंगी.’’
निखिल का चेहरा गुस्से से लाल हो रहा था. रंजनी को भी उस की बेवकूफीभरी बातों पर गुस्सा आ रहा था.
रंजनी ने कहा, ‘‘अभी अपने कमरे में जाओ, कुछ पढ़ाई करो. इस विषय पर फिर कभी बात करेंगे.’’
निखिल वैसे तो बहुत शांत स्वभाव के हैं लेकिन अन्वी की बातों को सुन कर उन को भी अच्छा नहीं लगा था. उन का चेहरा भी गुस्से से लाल हो रहा था. अन्वी जोरजोर से पैर पटकती हुई अपने कमरे की ओर चली गई और नाराजगी प्रकट करने के लिए बहुत जोर से दरवाजा बंद कर लिया था.
निखिल ने शांत भाव से पत्नी की हथेलियों को अपनी मुट्ठी में बंद कर लिया था जैसे वह इन कठिन लमहों में पत्नी का सहारा चाह रहा हो.
रंजनी ने भी पति की भावनाओं को समझते हुए अपनी दूसरी हथेली रख कर प्यारभरी नजरों से देख कर कहा, ‘‘सब ठीक हो जाएगा.’’
अब घर का माहौल बदल चुका था. अन्वी का मूड बिगड़ा रहता. अकसर जिद करने लगती कि पापा को आप कब बुला रहे हैं वरना वह ही मम्मी से बात कर ले. पापा से कहिए कि वे रिषभ के पेरैंट्स से मिल कर हमारी शादी की बात करें. अब रिषभ जबतब घर आ जाता और उस को देख कर अन्वी की आंखें खुशी से खिल पड़तीं और वह जितनी देर रहता, अन्वी उस के आगेपीछे घूमती रहती.
निखिल एक दिन पत्नी से बोले, ‘‘रिषभ मुझे पसंद है लेकिन अन्वी को इन दिनों अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए. फाइनल एग्जाम की डेट नजदीक आ रही है.’’
‘‘अन्वी अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो,’’ निखिल पहली बार नाराजगीभरे स्वर में बोले थे.
वह अन्वी की हरकतों को देख कर चिंतित रहने लगे थे. एक दिन वे पत्नी से बोले, ‘‘वह तुम्हारे ज्यादा नजदीक है, तुम्हारी बातें ज्यादा मानती है, इसलिए अब तुम ही उस को सही लाइन पर ला सकती हो.’’
रंजनी भी देख रही थी कि अन्वी का पढ़ाई से बिलकुल ध्यान हट गया था और वह ज्यादातर फोन से चिपकी रहती या फिर रिषभ के साथ रहती.
एक दिन अन्वी को खुश देख कर रंजनी उस के पास बेड पर लेट गई और
बोली, ‘‘रिषभ कैसा है, काफी दिनों से आया नहीं? क्या तुम लोगों में झगड़ा हो गया है?’’
‘‘अरे नहीं दी, वह कह रहा है कि इस बार उसे फाइनल निकालना ही है.’’
‘‘अच्छा, ऐसा है. हम लोग भी बहुत खुश होते हैं जब तुम कहती हो कि मुझे तो इसी अटैम्प्ट में सीए पास करना है. मम्मीपापा तो मुझ से रोज ही पूछा करते हैं कि अन्वी की तैयारी कैसी चल रही है, वे लोग तो बहुत प्राउड फील कर रहे हैं कि अन्वी इस साल सीए जरूर पास कर लेगी.
‘‘रिषभ से तुम्हें प्यार है, डियर, यह उम्र ही प्यार करने की है और उस से शादी करने की इच्छा है तो इस में कुछ भी गलत नहीं है. आखिर मुझे भी तो निखिल से प्यार हुआ था लेकिन हम लोगों ने पहले कैरियर पर ध्यान दिया, फिर शादी की.
‘‘हम दोनों तो बहुत खुश होते हैं कि चलो, मेरी गुडि़या जैसी नटखट मनचली को कोई पसंद तो आया लेकिन अन्वी डियर, उसे अपने पैरों पर तो खड़े होने दो.
‘‘क्या वह अपने पापा से पैसे मांग कर तुम्हारे शौक पूरे करेगा? तुम्हें ब्रैंडेड ड्रैस चाहिए, शौपिंग, थिएटर, मूवी और आउटिंग के लिए पैसे क्या वह अपने पापा से मांगता फिरेगा? वह बता रहा था कि उस के पापा मस्तमौला हैं, अपनी दोस्तीयारी में रहते हैं. उस के पापा का मन होगा तो देंगे वरना मना कर देंगे. फिर?’’ रंजनी के कहने की स्टाइल पर अन्वी को हंसी आ गई थी.
‘‘हम सब मम्मीपापा को बुला कर तुम्हारे रिषभ के मौमडैड से मिलने जरूर जाएंगे लेकिन तुम्हें मेरी एक बात जरूर माननी पड़ेगी.’’
अन्वी उठ कर बैठ गई और दी का मुंह देखने लगी कि वे अब कौन सी शर्त उस पर थोपने वाली हैं, बोली, ‘‘कौन सी बात?’’
‘‘अभी अपने रिषभ से ध्यान हटा कर सीए के फाइनल एग्जाम की तैयारी करनी होगी. तुम सीए पास कर लो, फिर हम लोग खुशीखुशी धूमधाम से जिस से कहोगी, उस से तुम्हारी शादी कर देंगे.’’
अन्वी काफी देर तक पसोपेश में सोचती रही. फिर उस ने रिषभ को फोन लगा कर बात की. लगभग एक घंटे के बाद उस ने अपनी रजामंदी दी. अब जा कर रंजनी ने चैन की सांस ली थी.
निखिल को भी सारी बातें सुन कर राहत मिली.
अब वह देख रही थी कि अन्वी ने सचमुच अपने को पढ़ाई में झांक दिया था. अब वह कहती कि मुझे बारबार एक ही चीज की पढ़ाई थोड़े ही करनी है. वह मोबाइल को अपने से दूर रखती थी. एक दिन रंजनी ने सुना था कि वह फोन पर कह रही थी कि रिषभ अब एग्जाम के बाद ही मिलेंगे. मिलनेजुलने के चक्कर में समय खराब होता है और पढ़ाई में डिस्टरबैंस हो जाता है. प्लीज रिषभ, यदि शादी करनी है तो सीए पास करना जरूरी है. अब सब तरफ से ध्यान हटा कर पढ़ाई पर ही ध्यान लगाओ.
‘‘दी, रिषभ कह रहा था कि यदि फेल हो जाएंगे तो एग्जाम फिर से दे देंगे. मुझे तो उस पर बहुत जोर से गुस्सा आया.’’
रिषभ आता तो अन्वी उस से केवल बुक्स, नोट्स या फिर पढ़ाई की बात करती.
वह नोटिस कर रही थी कि रिषभ शायद पढ़ाई के लिए सीरियस नहीं था क्योंकि जबतब अन्वी से आइसक्रीम खाने या बाहर चलने के लिए फोन करता लेकिन अन्वी बहुत कम ही जाया करती और अपनी पढ़ाई में जुटी रहती.
जब सीए का रिजल्ट आया और अन्वी का रोल नंबर देखते ही घर में खुशी छा गई थी. गांव से मम्मीपापा भी आ गए थे.
रिषभ बुरी तरह फेल हो गया था.
अन्वी बोली, ‘‘देख लो दी, रिषभ फेल हो गया लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. दी, वह कह रहा है कि एक बार फिर से एग्जाम दूंगा. यदि फिर भी पास नहीं हुआ तो कोई बिजनैस कर लेगा.’’
अम्मा बोलीं, ‘‘बिटिया, तुम ने हम लोगों की बात मानी है तो अब हमारी बारी है कि हम लोग भी तुम्हारी बात को मानें. तुम्हीं बताओ कि हम
लोग रिषभ के घर रिश्ता पक्का करने के लिए कब जाएं?’’
‘‘अभी रुक जाइए, पापा. मेरी जौब लग गई है. उम्मीद है कि जहां बिग फोर में मैं ने ट्रेनिंग की थी वहीं मेरी प्रौपर जौब लग जाएगी. मम्मी, मुझे कुछ दिन अपनी सैलरी का मजा तो लेने दीजिए.’’
जौब लगते ही उस के चेहरे की चमक और खुशी देखते ही बनती थी. अब वह अपने औफिस में बहुत बिजी रहने लगी थी.
रिषभ इतवार को जब आता, दोनों साथसाथ कभी मूवी देखने तो कभी आइसक्रीम खाने जाते लेकिन मोबाइल पर माई हैंडसम की जगह अब रिषभ ने ले ली थी.
रंजनी ने गौर किया था कि अब वह खास बौयफ्रैंड नहीं, बस, दोस्त लगता था. अब अन्वी अपनी शादी की बात कभी नहीं करती बल्कि कहती, ‘रिषभ तो दी अपने कैरियर के लिए बिलकुल भी सीरियस नहीं है. ऐसा लगता है जैसे वह पढ़ाई करना ही नहीं चाहता और वह तो केवल अपने डैड का पैसा उड़ा रहा है. उस की मां के बारे में तो किसी को कुछ पता ही नहीं रहता और उस की बहन मुंबई में किसी के साथ लिवइन में रह रही है. रिषभ तो मुझ से भी लिवइन में रहने की जिद कर रहा था. इस के घर जाती हूं तो बिलकुल सबकुछ बेतरतीब, अस्तव्यस्त दिखाई पड़ता है. मेरा तो उस के घर में दम घुटता है, तुरंत भाग कर बाहर आ जाती हूं.’
रिषभ ने 6 महीने बाद फिर से एग्जाम दिया. फिर फेल हो गया. फेल होने के बाद वह लापरवाही से बोला, ‘‘अब मेरा बूता नहीं है कि मैं इस से ज्यादा पढ़ाई कर सकूं. एग्जाम एक बार और दे दूंगा. फिर क्या करना है, यह रिजल्ट आने के बाद सोचूंगा.’’
एक दिन रंजनी ने पूछा, ‘‘अब रिषभ शादी करने के लिए जिद नहीं करता?’’
‘‘हां, वह मुझ से बारबार कहता रहता है कि शादी कर लेते हैं, फिर पढ़ाई करता रहूंगा.’’
निखिल ने पूछा, ‘‘तुम क्या चाहती हो?’’
‘‘अभी ठहरिए, देखती हूं कि वह अपने कैरियर के लिए कितना सीरियस है, फिर सोचूंगी.’’
उस रात रंजनी निखिल से बोली, ‘‘मेरी अन्वी बहुत समझदार है. प्यार भी किया है तो दीवानापन नहीं है. अपना भलाबुरा समझ रही है.’’ रंजनी अपनी छोटी बहन का सयानापन और उस की परिपक्वता देख रही थी. वह सोच रही थी कि नई पीढ़ी का इश्क अंधा नहीं है बल्कि अब इश्क समझदार हो गया है. प्यार अब प्रैक्टिकल ग्राउंड पर सोचविचार कर ही किया जा रहा है.
अपने भविष्य के प्रति जागरूक और अलर्ट हो कर ही प्यार और इश्क के चक्कर में पड़ना सही भी है.
अन्वी मन ही मन सोच रही थी कि वह रिषभ के इसी बेफिक्रे अंदाज से ही तो इश्क कर बैठी थी लेकिन ऐसे लापरवाह इंसान के साथ दोस्ती तो निभाई जा सकती है मगर उसे अपना जीवनसाथी बनाना अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ करना है.
‘‘दी, मैं ने ‘माई हैंडसम’ के नंबर को ब्लौक कर दिया’’ यह कह कर वह बच्चों की तरह खुश हो कर बहन के गले में लग गई थी.
रंजनी सोच में पड़ गई थी कि आज के युवा कुछ ज्यादा ही प्रैक्टिकल हो गए हैं. खैर, निर्णय इन लोगों को खुद लेने दो अपने जीवन का, यही शायद ठीक है सब के लिए.
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