Romantic Story in Hindi :
अन्वी के बदलते रंगढंग देख कर रंजनी समझ गई थी कि उस की बहन पर इश्क का खुमार चढ़ गया है. खैर, यह उम्र ही ऐसी होती है. लेकिन रंजनी नहीं चाहती थी कि अन्वी अपने कैरियर को ताक पर रख दे, इश्क के चक्कर में पड़ कर. पर अन्वी के निर्णय ने तो रंजनी को हैरत में डाल दिया था.
ट्रिनट्रिनट्रिन. डोरबेल की आवाज सुनते ही अन्वी ने दरवाजा खोला और हड़बड़ाई सी अपनी दीदी रंजनी से बोली, ‘‘प्लीज दीदी, मुझे डिस्टर्ब मत करना. मैं एक जरूरी कौल पर हूं.’’
रंजनी के चेहरे पर मुसकान छा गई थी, क्योंकि पहले वह भी तो जिंदगी के इन अनुभवों से गुजर चुकी थी. वह ऐसे कौल्स की असलियत को अच्छी तरह जानती थी.
‘‘ओके माई डियर,’’ कहते हुए पास में रखी ‘गृहशोभा’ पत्रिका के पेज पलटने लगी थी लेकिन उस का ध्यान अन्वी पर ही अटका हुआ था.
19 वर्षीया अन्वी रंजनी की छोटी बहन है. उन के मम्मीपापा यूपी के कासगंज जैसे छोटे शहर में रहते हैं. वहां कोचिंग या पढ़ाई की अच्छी सुविधा नहीं है, इसलिए रंजनी ने अपने मम्मीपापा से जिद कर के उस को अपने पास दिल्ली जैसे शहर में रखा हुआ है. रंजनी अपनी छोटी बहन की हर हरकत पर अपनी काग दृष्टि लगाए रखती है क्योंकि वह थोड़ी चुलबुली सी आधुनिका है. उस के हर कदम पर वह पूरी निगरानी रखती है.
यदि कुछ गड़बड़ हो गई तो आखिर मम्मीपापा को उसी को तो जवाब देना होगा क्योंकि वही तो अन्वी को जिद कर के अपने साथ रहने के लिए ले कर आई थी. जबकि, निखिल उस के पति, के चेहरे पर नाराजगी स्पष्ट झलक रही थी.
अन्वी बचपन से पढ़ने में बहुत तेज थी. उस का सपना था कि वह सीए बने.
इसलिए मम्मीपापा ने उस के भरोसे और विश्वास पर ही अन्वी को उन लोगों के पास रहने के लिए भेजा था जबकि पापा तो उसे होस्टल में रखना चाहते थे.
अन्वी को उस के पेरैंट्स ने उसे पूरी छूट दे रखी थी कि वह अपना मनचाहा कैरियर चुन सकती है.
अन्वी ने सीए बनना चाहा और उस की एंट्रैंस की परीक्षा पास भी कर चुकी थी.
वैसे, दोनों बहनों के बीच आपस में बहुत अच्छी समझदारी थी. अन्वी कालेज से लौट कर आते ही अपने दोस्तों की सारी बातें रंजनी को बताया करती थी.
रंजनी की ओर से भी किसी भी दोस्त के घर आनेजाने पर कोई मनाही या प्रतिबंध नहीं था. जब दोस्तों का ग्रुप घर आता तो हर बार रंजनी अपनी ओर से यह जानने की कोशिश किया करती कि अन्वी का विशेष ध्यान किस लड़के पर है. वह उसे छेड़ती हुई कहती भी कि अन्वी तुम्हें इन सब में कौन सब से अच्छा लगता है तो वह अपनी दी को प्यार से घूर कर हंस दिया करती.
‘दीदी, मेरी जासूसी करने की कोई जरूरत नहीं है. वैसे, आप को बता देती हूं कि जैसा आप सोच रही हैं, वैसा कुछ भी नहीं है. अभी मुझे अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना है. प्यारव्यार के लिए अभी सारी उम्र पड़ी है.’
सीए का एंट्रैंस पास करने के बाद अन्वी फाइनल ग्रुप की तैयारी में जुटी हुई थी लेकिन लगभग सालभर बाद ही अन्वी के व्यवहार में आया बदलाव दोस्त जैसी बहन की आंखों से भला कैसे छिपता.
अब अन्वी के हाथों से फोन नहीं छूटता और वह अपने कमरे में बैठ कर फोन पर बहुत धीमेधीमे लंबीलंबी बातें किया करती. पहले तो उस का फोन कहीं भी पड़ा रहा करता था लेकिन अब वह अपना फोन अपने आसपास रखती और थोड़ीथोड़ी देर में अपना फोन चैक करती रहती थी. रंजनी ने अपनी छोटी बहन के इस नए बदलाव को नोटिस किया और समझ गई कि जरूर किसी लड़के के साथ इस का कुछ चक्कर शुरू हो गया है.
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