परिवारों में आपसी प्रेम, शांति, तालमेल को ले कर दिए जाने वाले तमाम धार्मिक उपदेशों पर पारिवारिक कलह भारी पड़ रही है. परिवारों में तनाव बढ़ता जा रहा है और गंभीर अवसाद का रूप ले रहा है.

पतिपत्नी, बापबेटे, भाईभाई, बहनभाई के बीच झगड़ा मर्यादाओं को लांघ रहा है. खून के रिश्ते तारतार होते दिख रहे हैं. वह चाहे राजनीतिक परिवार हो, औद्योगिक हो या अन्य सामान्य परिवार. लोभ, लालच, वर्चस्व की इच्छा हावी हो रही है. परस्पर मानसम्मान, आदर भाव खत्म होते नजर आते हैं.

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