Religious Conspiracy: कोई भी दावे से यह नहीं कह सकता कि ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बटुकों का यौनशोषण किया है या नहीं. हकीकत हर कोई समझ रहा है कि इस के पीछे ब्राह्मणों की अपनी वर्णगत श्रेष्ठता की शाश्वत लड़ाई है. मुद्दत बात एक बार फिर शैव और वैष्णव मतों के मतभेद उजागर हुए हैं. कानूनी फैसला जो भी आए लेकिन इस विवाद ने सनातनी साधुसंतों के अहं और स्वार्थ फिर उधेड़ कर रख दिए हैं.

अविमुक्तेश्वरानंद अभिमन्यु की तरह घिर गए हैं. यह खेल कहां जा कर और कैसे खत्म होगा, इस का अंदाजा लगाना मुश्किल है. यह ड्रामा या कहानी, कुछ भी कह लें, शुरू से ही किसी मसालेदार हिंदी फिल्म से कम नहीं जिस में धार्मिक और राजनीतिक षड्यंत्रों सहित रहस्य, रोमांच, हिंसा, मारधाड़, खेमेबाजी, पुलिस, अदालत, कानून और सैक्स वगैरह सब ठुंसे हुए हैं. इस दिलचस्प कहानी को सिरे से समझने से पहले राजनीति को छोड़ उस से जुड़े एक प्रमुख किरदार, जिस के चलते कहानी में जान आई, की नाटकीय एंट्री और उस का रोल देखना मौजूं होगा.

यह पात्र आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ अश्विनी पांडेय है जो भगवा खेमे के चहेते वैष्णव संत रामभद्राचार्य का वैष्णव शिष्य है. उस पर बीते 8 मार्च को चलती ट्रेन में जानलेवा हमला हुआ था. उस दिन आशुतोष रीवा एक्सप्रेस ट्रेन से गाजियाबाद से प्रयागराज जा रहा था. सुबह कोई 5 बजे ट्रेन सिराथू रेलवे स्टेशन पहुंची तो एकाएक एक आदमी ने एसी कोच में आ कर उस पर उस्तरे से हमला कर दिया. हमले में आशुतोष की नाक पर चोट लगी. उस ने टौयलेट में जा कर अपनी जान बचाई.

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