Hindi Story: रोज की तरह स्कूल से घर लौट कर रोहित आटो पर बैठेबैठे ही जोर से चिल्लाया, ‘‘मां, मां, शेखूभाई को पैसे दो,’’ फिर पलट कर आटो वाले से बोला, ‘‘तुम रुकना भैया, मैं अभी पैसे ले कर आता हूं.’’
‘‘कल ले लूंगा भैयाजी, आज देर हो रही है, अभी चलता हूं,’’ कह कर आटो वाला चल दिया.
‘मम्मी सुन क्यों नहीं रहीं?’ रोहित ने अपनेआप से ही प्रश्न किया फिर एक जूता इधर उछाला, दूसरा उधर और हाथ का बैग मेज पर रख कर वह मां के कमरे की ओर भाग लिया.
घर में मां को हर जगह ढूंढ़ लेने के बाद रोहित एक जगह खड़ा हो कर सोचने लगा कि आखिर मम्मी कहां गईं तभी पास खडे़ रामू ने धीरे से बताया, ‘‘रोहित बाबा, आप की मम्मी तो अचानक बनारस चली गईं.’’
‘‘तो तुम ने पहले क्यों नहीं बताया. मैं कब से उन्हें ढूंढ़ रहा हूं,’’ रोहित गुस्से से बोला.’’
‘‘बाबा, आप के पापा ने कहा है कि जरूरत पडे़ तो रोहित से कहना वह फोन पर मुझ से बात कर लेगा.’’
पापा का नाम आते ही वह चुप हो गया.
रोहित का सारा गुस्सा शांत हो गया और मन ही मन वह सहम गया. घर में रोहित का मन नहीं लगा तो वह उदास हो कर बाहर बरामदे में आ कर बैठ गया और सोचने लगा, उस की किसी बात से मां कभी नाराज नहीं होतीं तो आज यों कैसे जा सकती हैं? किस से क्या कहे, क्या पूछे. पापा से तो वैसे ही उसे डर लगता है.
सामने के घर से डाक्टर आंटी ने झांका और उसे देख कर बाहर निकल आईं. रोहित के सिर पर हाथ रख कर पुचकारते हुए बोलीं, ‘‘रोहित, मम्मी तुम को बिना बताए चली गईं. बड़ी गंदी हैं न, यहां मेरे पास आओ. हम दोनों खेलेंगे. फिर मैं तुम्हारा होमवर्क पूरा करवा दूंगी, उस के बाद तुम सो जाना. चले आओ बेटे, चिंता न करो.’’
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन





