Women Rights: प्रेम और स्वतंत्रता दो चीजें हैं जो भारतीय पौराणिक पाखंडी समाज को बिलकुल अच्छी नहीं लगतीं. इसलिए नहीं कि इन में इस समाज को कोई हानि होती है बल्कि इसलिए कि इस समाज वालों की दलाली पर फर्क पड़ता है. गंगायमुना के तथाकथित पूजापाठी राज्य उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के जैतपुर पुलिस स्टेशन में 18 साल से बड़ी एक लड़की के पेरैंट्स ने एफआईआर दर्ज कराई कि उन की बेटी ने एक शादीशुदा व्यक्ति के साथ रह कर अनैतिक अपराध किया है, उसे गिरफ्तार किया जाए.

गनीमत है कि भारतीय संविधान में व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं की रक्षा करते हुए हाईकोर्ट के न्यायाधीश जे जे मुनीर और तरुण सक्सेना ने न केवल पुलिस को इस जोड़े को गिरफ्तार करने पर पाबंदी लगाई बल्कि परिवार द्वारा दोनों को परेशान न किया जाए, यह दायित्व भी पुलिस को सौंपा. भारतीय संविधान अपने अनुच्छेद 21 के तहत हर बालिग को अपने अनुसार जीने का मौलिक अधिकार देता है. नया भगवाई आपराधिक कानून -भारतीय न्याय संहिता- भी चाह कर इस स्वतंत्रता को छीन नहीं पाया. अपराध तभी है जब जबरदस्ती किसी लड़की का अपहरण किया जाए, उस की मरजी के खिलाफ या उसे किसी धोखे में रख कर उस के साथ रहा जाए. यहां लड़की ने खुल कर अपनी इच्छा एक विवाहित पुरुष के साथ रहने की व्यक्त की.

जो पुराण औरतों को बहलाफुसला कर, उन्हें अपहरण कर के, नीति के बिना संतानों, कितने ही पुरुषों और कितनी ही स्त्रियों के शारीरिक संबंधों की कहानियों से भरे हों, उन का हवाला दे कर समाज में नैतिकता को थोपना हमारे दोगलेपन की निशानी ही है जिस में हम ही क्या, हर धर्म माहिर है.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...