Women Reservation Bill: साठसत्तर सालों से हिंदूहिंदू, हिंदू राष्ट्र, हिंदू आस्था, हिंदू अस्मिता आदि कहकह कर भारतीय जनता पार्टी ने देश के मंदिरों के लिए धर्म से मोटी कमाई का एक बड़ा साधन तो बना ही दिया वहीं, पौराणिक युग और मध्यकाल के राजाओं की तरह, इसी धर्म को खुद के लिए उस ने देश की सत्ता पर काबिज होने का भी साधन बना लिया.

संसद में महिला आरक्षण कानून के लिए विशेष अधिवेशन बुलाया जाना भी इसी कुत्सित कड़ी की एक और चाल है कि जिस से महिलाओं के बहाने उन के ज्यादा से ज्यादा वोट अपने पक्ष में पक्के किए जा सकें, साथ ही, जनता पर लोकतंत्र, विचारों की स्वतंत्रता, काम की स्वतंत्रता, नए निर्माणों आदि की जगह अलोकतांत्रिक, अंधविश्वासी और पाखंडी शासन थोपा जा सके.

संसद में पेश किया गया महिला आरक्षण संशोधन बिल दरअसल पौराणिक राजाओं की तरह का काम था जिस में एक ने अपनी पत्नी के अपहरण के बदले अपने विरोधी से युद्ध किया और दूसरे ने अपनी संयुक्त पत्नी के अपमान के बदले अपने चचेरे भाइयों से युद्ध किया. पौराणिक कहानियों को ऐतिहासिक तथ्य मानते हुए आज भी उन्हीं के नाम पर सिर फोड़े जा रहे हैं और देश की शिक्षित, कर्मठ महिलाओं को बराबरी की जगह धर्मकर्म और पतिपरमेश्वर की सेवा के  लिए उत्साहित किया जा रहा है. महिला आरक्षण संशोधन बिल की एक भी पंक्ति ऐसी नहीं कि जिस से आम महिलाओं को जरा सा भी कोई नया अतिरिक्त अधिकार आज या भविष्य में कभी मिलता.

राजनीति में और ज्यादा महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी की चेष्टा को तब सच माना जाता जब उस के सांसदों और विधायकों में से आधी महिलाएं होतीं और वे महिलाओं पर बढ़ते जुल्मों का विरोध कर रही होतीं. संसद में ट्रेजरी बैंच, सत्ता पक्ष, आगे बैठने वालों में आखिर कितनी औरतें हैं? भाजपाशासित किस राज्य की मुख्यमंत्री महिला है जो अपने दमखम पर नेता बनी हो? भारतीय जनता पार्टी की महिला सांसदों, विधायकों और नेताओं का उपयोग तो केवल तब किया जाता है जब विपक्ष की सरकार हो और उसे किसी मामले में नीचा दिखाना हो.

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