किन्नर को आमतौर पर ‘हिजड़ा’ कह कर संबोधित किया जाता है. अपने चालचलन, हावभाव और परिधानों के कारण ये आसानी से पहचान में आ जाते हैं. बच्चे के जन्म के बाद या विवाह समारोह के बाद लोगों के घरों में ये नाचगाना करते हैं और उन परिवारों को आशीर्वाद देते हैं. ये अपनी जीविका चलाने के लिए उन परिवारों से रुपए, कपड़े और जेवर की मांग करते हैं. देश के लोग अंधविश्वासी हैं ही और इसीलिए उन के श्राप के डर से उन की मांग पूरी कर देते हैं.

शिक्षित जनता के मन में यह अंधविश्वास फैला हुआ है कि यदि बुधवार को किन्नर लोग यदि किसी को आशीर्वाद देते हैं, तो उस का समय बलवान हो जाता है.

हकीकत यह है कि किन्नर अपराध जगत से जुड़े होते हैं. ये लूटपाट में भी शामिल होते हैं. कई बार तो ये लड़कों को जबरदस्ती उठा कर उन के साथ अमानवीय व्यवहार कर के उन्हें हिजड़ा बना देते हैं. ट्रेन, बस, ट्रैफिक सिग्नल पर या शादीब्याह में मनचाही रकम न मिलने पर अभद्रता और गुंडागर्दी करते भी देखे जाते हैं.

हालांकि, वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि किन्नर देश के नागरिक हैं, इन्हें समाज में सामान्य नागरिकों के मुकाबले विशेष स्थान मिलना चाहिए. इन्हें तीसरे लिंग के रूप में पहचान दे दी गई है. किन्नरों को जन्म प्रमाणपत्र, राशनकार्ड, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसैंस में तीसरे लिंग के तौर पर पहचान हासिल करने का अधिकार मिल गया है.

किन्नरों को हम सब अपने से दोयम स्तर के समझते आए हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हालिया आयोजित कुंभ मेले के दौरान मैं वहां गई. मेले के प्रांगण में किन्नर अखाड़े का भव्य बैनर देख मैं चौंक उठी. पंडाल के अंदर प्रवेश करते ही यहांवहां सजीधजी किन्नरों की चहलपहल थी. पंडाल में खासी भीड़ व रौनक थी.

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