Husband Wife Case: रत्नप्रभा प्रकाश और ध्यानाबाजी की शादी 1985 में हुई थी. रत्नाकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे और जून 2018 में रिटायर हुए. रिटायरमैंट तक दोनों पतिपत्नी साथ रहे. रिटायरमैंट के बाद रत्नाकर अपने गांव चले गए लेकिन ध्यानाबाजी पति के साथ गांव जाने को तैयार नहीं हुईं. यहीं से दोनों के बीच विवाद बढ़ा और मामला कोर्ट तक पहुंचा. कोर्ट में ध्यानाबाजी ने आरोप लगाया कि पति ने उन के साथ दुर्व्यवहार किया और दूसरी महिला के साथ रहते हैं लेकिन इन दोनों आरोपों को वह कोर्ट में साबित नहीं कर पाई.

ध्यानाबाजी 34 साल तक पति के साथ रही इस बीच दोनों के बीच कोई विवाद नहीं हुआ. रिटायरमैंट के बाद गांव जाने की वजह से दोनों के बीच दूरियां पैदा हुईं. CrPC धारा 125(4) के अनुसार, “जो पत्नी बिना किसी पर्याप्त कारण के अपने पति के साथ रहने से इनकार करती है, वह CrPC की धारा 125 के तहत भरणपोषण की हकदार नहीं है.” इस मामले में पति की ओर से कोई गलत व्यवहार साबित नहीं हुआ इसलिए पत्नी का भरणपोषण का दावा खारिज हो गया.

फैमिली कोर्ट ने पहले ही पत्नी का दावा खारिज कर दिया था. अब हाईकोर्ट ने भी पत्नी की रिवीजन याचिका खारिज कर दी. CrPC धारा 125 केवल जरूरतमंद पत्नी को सुरक्षा देता है वहीं धारा 125(4) साफ तौर पर कहता है कि यदि पत्नी बिना पर्याप्त कारण पति के साथ रहने से मना करती है तो वह भरणपोषण नहीं पा सकती. पर्याप्त कारण में क्रूरता, खतरा, शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न शामिल हैं हर केस के तथ्य अलगअलग होते हैं. अगर पत्नी के पास क्रूरता या खतरे के ठोस सबूत हों, तो कोर्ट भरणपोषण दे सकता है. यह फैसला सिर्फ उन मामलों पर लागू होता है जहां अलगाव पूरी तरह मर्जी से हो. Husband Wife Case

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