Delhi Infrastructure Issues: 7 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार ने एक साथ ऐलान किया कि दिल्ली की 1511 अनधिकृत कॉलोनियों को जहाँ है जैसा है के आधार पर नियमित कर दिया जाएगा जिसका फायदा इन कालोनियों में रहने वाले करीब 45 लाख लोगों को होगा. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय आवास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसे बीजेपी सरकार का ऐतिहासिक कदम बताया लेकिन सच्चाई यह है कि यह कोई ऐतिहासिक कदम नहीं बल्कि भाजपा की साफ-साफ वोट बैंक पॉलिटिक्स का हिस्सा है.

अनधिकृत कॉलोनियां पहले से ही दिल्ली की सबसे बड़ी समस्या हैं. ये बिना किसी मास्टर प्लान, बिना लेआउट अप्रूवल और बिना बुनियादी सुविधाओं के बसी हुई हैं. अब भाजपा को जहाँ है जैसा है वैसा ही मंजूर है यानी न कोई नया प्लान, न कोई सख्ती, न कोई जवाबदेही बस कागज पर क़ानूनी मंजूरी दे दो और बदले में वोट ले लो. यह ठीक वही पुरानी रणनीति है जो भाजपा पिछले कई सालों से अपना रही है. समस्या का परमानेंट हल नहीं बल्कि समस्या को वोट में बदलने की घटिया मानसिकता.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 'जहाँ है जैसा है' का मतलब अवैध कालोनियों को पुरस्कृत करना नहीं है? दिल्ली का मास्टर प्लान 2021 पहले ही फेल हो चुका है. इन कॉलोनियों में सड़कें संकरी, पानी की किल्लत और बिजली चोरी आम बात है. अब इन्हें बिना किसी बदलाव के नियमित करने का मतलब है कि आने वाले सालों में दिल्ली और भी ज्यादा भीड़भाड़ वाला और प्रदूषित शहर बन जाएगा. ट्रैफिक जाम, आग लगने की घटनाएं और स्वास्थ्य संकट बढ़ेंगे लेकिन भाजपा को इसकी कोई चिंता नहीं. बीजेपी को सिर्फ़ 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिले वोटों का फायदा उठाना है.

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