कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण और लगातार हो रही मौतों के बीच दुनिया उन डाक्टर्स, रिसर्चर्स और वैज्ञानिकों की ओर बड़ी उम्मीदों से ताक रही है जो इस का इलाज ढूंढ़ने की कोशिशों में रातदिन एक किए हुए हैं. इस वक्त दुनिया को इंतजार है तो, बस, कोरोना के वैक्सीन का, जो मौत के ब्लैकहोल में तेजी से जाती जिंदगियों को बचा ले. सब की निगाहें इसी ओर लगी हैं कि कब कोविड-19 को खत्म करने वाली वैक्सीन बनेगी और स्थितियां सामान्य होने की ओर लौटेंगीं.

दुनिया के लगभग सभी देश कोरोना

वैक्सीन बनाने की जद्दोजेहद में लगे हुए हैं. दुनियाभर में 200 से ज्यादा संस्थानों में वैक्सीन पर शोध जारी है, जिन में से 21 से ज्यादा वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल की स्टेज में हैं. भारत, ब्रिटेन, अमेरिका, चीन और रूस समेत कई देशों को वैक्सीन के ट्रायल में सफलता मिलती दिख भी रही है. इस बीच, ब्रिटेन की औक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका से बड़ी खबर आई है. वहां बनाई गई वैक्सीन अपने पहले और दूसरे फेज के ह्यूमन ट्रायल में काफी असरकारक साबित हुई है और अब वहां तीसरे फेज का ट्रायल शुरू हो गया है.

औक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका फार्मा कंपनी कोरोना वैक्सीन के लिए जारी अपने परीक्षणों में दुनिया की तमाम रिसर्च और प्रयोगों में आगे चल रही हैं. बता दें कि औक्सफोर्ड ने वैश्विक स्तर पर  वैक्सीन के उत्पादन के लिए दवा निर्माता कंपनी एस्ट्राजेनेका के साथ सा झेदारी की है और कंपनी पहले राउंड में ही 2 अरब खुराक बनाने की प्रतिबद्धता जता चुकी है.

गौरतलब है कि औक्सफोर्ड ने कोरोना वायरस की वैक्सीन ष्टद्ध्नस्रहृ3१ ठ्ठष्टशङ्क-१९ का मानव परीक्षण 4 महीने पहले शुरू किया था. ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने पहली बार अप्रैल में एक हजार लोगों पर वैक्सीन का परीक्षण शुरू किया था. डाक्टर्स का कहना है कि जिन लोगों को यह वैक्सीन लगाई गई थी, उन में सुरक्षात्मक प्रतिरोधक प्रतिक्रिया के उत्पन्न होने से वैक्सीन की सफलता की दिशा में बड़ी उम्मीद उभरी है.

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