Divorce Celebration: जैसे जैसे लोगों को यह समझ आने लगा है कि तलाक के बाद के अवसाद को अगर दूर करना है तो उसका भी शादी की तरह जश्न मनाना चाहिए. जिससे यह महसूस हो कि यह उतना दुखद होता नहीं है जितना कि कट्टरपंथियों ने इसे बना दिया है. दरअसल में विवाह विच्छेद यानी तलाक में पंडे पुजारियों को दान दक्षिणा नहीं मिलते इसलिए भी वे तलाक को धर्म, संस्कृति और संस्कारों के खिलाफ कृत्य करार देते रहते हैं. ये लोग चाहते हैं कि समाज में दुख दर्द और डर फैले रहें और उन्हें तरह तरह के काल्पनिक किस्से कहानियों के जरिए दूर करने का झांसा देकर पैसे एंठने का धंधा बदस्तूर फलता फूलता रहे.
इसी साल अप्रेल में एक चौंका देने बाली घटना मेरठ से सामने आई थी जब तलाक के जश्न का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था. यह वीडियो एक रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपने बेटी प्रणिती को फेमिली कोर्ट से तलाक मिल जाने के उपलक्ष्य में बनाया था. वीडियो में प्रणिती के परिवारजन ढोल धमाके के साथ जुलूस की शक्ल में उसे घर लाते दिखाई दे रहे हैं. रास्ते में जगह जगह मिठाई बांटी जा रही है और सभी खुश और नाचते गाते झूमते दिखाई दे रहे हैं
वजह उनकी लाडली को एक नारकीय जीवन से आजादी जो मिल गई थी. प्रणिति की शादी साल 2018 में हुई थी. उसके मुताबिक शादी के बाद से ही ससुराल बाले तरह तरह से उसे प्रताड़ित करते रहते थे. यह तलाक भी परस्पर सहमति बाली धारा 13 ( बी ) के तहत हुआ था. तब ज्ञानेंद्र शर्मा ने कहा था कि बेटी समाज के लिए बोझ नहीं बल्कि उसका आत्मसम्मान और अभिमान सर्वोपरि है.
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