मुसलमानों की हत्याओं के आंकड़े भयावह हैं. पिछले 15 वर्षों में कोई 3 करोड़ मुसलमान इसलामिक देशों में मारे जा चुके हैं. कहीं आतंकवाद के नाम पर तो कहीं गौहत्या के नाम पर मुसलमान मर रहे हैं. वे दूसरी कौमों के हाथों भी मारे जा रहे हैं और अपनी ही कौम की साजिशों के शिकार भी हो रहे हैं. दुनिया की दूसरी सब से बड़ी कौम की इतनी बड़ी तबाही पर विश्व समुदाय क्यों खामोश है, इस की गहन पड़ताल करती यह रिपोर्ट.

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