भाग 1

लोग पढ़लिख कर आधुनिक होने का कितना भी दम भर लें, लेकिन सोच उन की वही पुरानी ही है. भूरा राजपूत अपनी दकियानूसी सोच को दरकिनार कर अगर बेटी शैफाली की बात मान लेते तो शायद आज उन की बेटी जीवित होती.

डेयरी संचालक भूरा राजपूत अपना काम निपटा कर वापस घर आया तो उस की नजर घरेलू कामों में लगीं बेटियों पर पड़ी. उन की 4 बेटियों में 3 तो घर में थीं लेकन सब से बड़ी बेटी शैफाली घर में नजर नहीं आई. उन्होंने पत्नी से पूछा, ‘‘रेनू, शैफाली दिखाई नहीं दे रही. वह कहीं गई है क्या?’’

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