मैं काफी कोशिश कर रहा था कि इस विषय पर न लिखूं. लेकिन, पिछले 15 दिनों से लगातार मीडिया में इस मुद्दे को सनसनीखेज बनाकर चलाए जाने से अब तंग आ चुका हूं. सुशांत क्या खाते थे?, क्या पीते थे?, उनके क्या सपने थे?, कैसे रहते थे?, दोस्त कोन थे?, भाई क्या करता है?, पिताजी रो रहे हैं?, कमरे कितने हैं?, चादर कैसी है? चाँद पर घर लिया है इत्यादि यह सब बातें मीडिया द्वारा जबरन लोगों को परोसी जा रही हैं.

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