भगवान के अस्तित्व को ले कर धर्म के ठेकेदार तरहतरह की मनगढ़ंत बातें करते हैं ताकि उन की मुफ्त की रोटी चल सके. आश्चर्य तो तब होता है जब पढ़ेलिखे लोग भी धर्म के इन ठेकेदारों की चिकनीचुपड़ी बातों में आ जाते हैं और अदृश्य भगवान को अपनी जिंदगी का सहारा मान कर अपनी मेहनत की कमाई लुटा देते हैं. प्रस्तुत है, अंधविश्वास को उजागर करता जगत यादव का यह लेख.

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