कहते हैं इंसान के विचार समुद्र की लहरों की तरह होते हैं. वे हरदम मचलने को तैयार रहते हैं. वहीं उस की भावनाओं की कोई थाह नहीं होती और भावनाएं ही उसे अपनों से जोड़े रखती हैं. लेकिन यह जरूरी नहीं कि भावनात्मक रिश्ता सिर्फ अपनों से ही हो. वह किसी से भी हो सकता है. कई भावनात्मक रिश्ते ऐसे भी होते हैं जिन का कोई नाम नहीं होता. इन में एकदूसरे के प्रति प्रेम, अपनेपन का भाव तो होता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि इन के बीच शारीरिक आकर्षण भी हो. इसे हम दिल का रिश्ता कहते हैं. इस भावनात्मक रिश्ते का न कोई नाम होता है और न ही इस में उम्र का कोई बंधन होता है. यह कभी भी किसी के साथ भी हो सकता है, लेकिन तभी जब दोनों के विचार आपस में मिलते हों.

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