Regime Change: दिल्ली में CJP के मंच से प्रशांत भूषण ने कहा कि हमें रिजिम चेंज चाहिए तो बीजेपी और उसकी IT सेल चिल्ला रही है कि ये देशद्रोह है, ये संविधान विरोधी है, ये विदेशी साजिश है. 2014 तक तो यही बीजेपी देश का रिजिम चेंज करने की बात करती थी और इस वक़्त पंजाब चुनाव में भी रिजिम चेंज करने की बात कर रही है. रिजिम बदलने की बात बीजेपी करे तो देशभक्ति और विपक्ष करे तो देशद्रोह, क्या यह दोगलापन नहीं?
पहले तो ये समझना होगा कि रिजिम चेंज कोई देशद्रोह नहीं है. ये राजनीति विज्ञान का सबसे आम शब्द है. जरुरी नहीं की हर रिजिम चेंज के लिए हिंसा और अराजकता पैदा हो. किसी भी लोकतान्त्रिक देश में जो चुनाव प्रक्रिया होती है वह रिजिम बदलने के लिए ही होती है लेकिन कई बार यह रिजिम चेंज चुनाव से नहीं आंदोलनों से होते हैं जिसमें जनता सड़कों पर उतर जाती है और सत्ता को बदल देती है. नेपाल, बंगलादेश, इजिप्ट और दूसरी जगहों पर रिजिम बदलने वाले आंदोलनों में हिंसा हुई क्योंकि शुरुआत में आंदोलन को दबाने के लिए सत्ता ने दमन और बर्बरता का रास्ता अपनाया.
बीजेपी ने खुद अपनी पार्टी में रिजिम चेंज किया है. बीजेपी आज जो है वो लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी वाली बीजेपी नहीं है. याद कीजिये कि 2013-14 में क्या हुआ था? गोवा में बैठक हुई, आडवाणी को साइडलाइन किया गया, यशवंत सिन्हा, शौरी और जोशी जैसे कद्दावर नेताओं को किनारे किया गया और नरेंद्र मोदी और अमित शाह की नई रिजिम बनी. पूरी पार्टी का संविधान बदल दिया गया, मार्गदर्शक मंडल नाम का एक डस्टबिन बनाया गया जिसमें सारे बुजुर्ग नेताओं को डाल दिया गया. यह दरअसल रिजिम चेंज ही था.
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