New Delhi Traders Association: दिल्ली के कनॉट प्लेस में न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन NDTA ने 16 अक्टूबर को प्रेस रिलीज जारी की. जिसमें कहा गया कि CJP के प्रोटेस्ट के कारण कारोबार ठप्प हो गया. मुंबई में भी यही रोना रोया गया कि धरने के कारण बिजनेस का नुकसान हुआ. अब सवाल यह है कि क्या सच में CJP के प्रोटेस्ट से व्यापार ठप्प हो चुका है? या यह व्यापारी संघों का पाखंड है?
सच बात तो यह कि कांवड़ हुजूम, मुहर्रम जुलूस, दस दिन की राम लीला, राम नवमी यात्रा, हनुमान जयंती पर शोभा यात्रा और कलश यात्राओं से व्यापार का कहीं ज्यादा नुकसान होता है. दिल्ली में चावड़ी बाजार, अजमेरी गेट और चांदनी चौक जैसे इलाकों के व्यापारी इन धार्मिक आयोजनों की वजह से कई कई दिनों तक खाली बैठते रहे हैं तब यही सवाल क्यों नहीं उठाते? प्रोटेस्ट कोई धार्मिक जुलुस नहीं है यह लोकतंत्र को बचाने की मुहिम है. क्या व्यापारियों को लोकतंत्र की जरूरत नहीं है? जो लोग प्रोटेस्ट में सड़कों पर उतरे हैं वे लोग भी तो अपना धंधा, नौकरी, खेती और व्यापार छोड़ कर आये हैं?
मतलब लोकतंत्र बचाने के लिए अगर कुछ दिन सड़क पर लोग बैठ गए तो व्यापारियों का व्यापार ठप्प हो गया? लेकिन जब उसी सड़क पर 10 दिन तक कांवड़ियों का डीजे बजता है, जब चावड़ी बाजार, अजमेरी गेट और चांदनी चौक जैसे बाजारों में रामलीला के नाम पर 15 दिन तक पूरा बाजार बैरिकेड हो जाता है, जब हर गली में कलश यात्रा के नाम पर 50 औरतों के पीछे 200 लठैत चलते हैं, तब इन व्यापारियों की जुबान क्यों नहीं खुलती? तब NDTA कहां चला जाता है?
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