UN Report on India: संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत जीना रोमेरो ने अपनी रिपोर्ट में सिर्फ दो लाइन लिखी हैं- “भारत के युवाओं को मेंटल हेल्थ या जेंडर जस्टिस पर बात करने पर उन्हें स्तिगमाटिजेशन झेलना पड़ता है और बदले की कार्रवाई का सामना करना पड़ता है” इतनी सी बात पर भारत सरकार आग बबूला हो गई. न्यूयॉर्क में भारत के फर्स्ट सेक्रेटरी अनुज स्वरूप ने कहा- “सुनी-सुनाई बातों को UN रिपोर्ट बना दिया गया है, यह अफवाह है, वेरिफाई करने से पहले vilify मत करो, UN की संस्थाओं ने इसी वजह से विश्वसनीयता खो दी है. भारत के संविधान में आर्टिकल 19 है, स्वतंत्र न्यायपालिका है और फ्री प्रेस है”

अब सवाल है, जीना रोमेरो ने गलत क्या कहा? क्या भारत में मेंटल हेल्थ पर बात करने पर बदले की कार्रवाई नहीं होती? UN की रिपोर्ट वाला पूरा मामला जून जुलाई के सीजेपी प्रोटेस्ट से जुड़ा है. CJP के प्रोटेस्ट में जो युवा बैठे थे, उनका मुद्दा ही मेंटल हेल्थ था. सीजेपी ने मुद्दा उठाया था कि पेपर लीक और सरकार की गलत नीतियों की वजह से देश में युवा डिप्रेशन में है, एंग्जायटी में है और आत्महत्या कर रहे है. सरकार ने उसका जवाब क्या दिया? दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज किया, महिला प्रदर्शनकारियों को घसीटा गया, पत्रकारों पर केस हुए और IT सेल ने ट्रेंड चलाया कि ये सब नशेड़ी, देशद्रोही और चाइना के एजेंट हैं.

NCRB का डेटा कहता है कि हर साल 13 हजार छात्र आत्महत्या करते हैं और सरकार के पास युवाओं के लिए एक भी नेशनल मेंटल हेल्थ पॉलिसी नहीं है क्योंकि इस सरकार को लगता है कि मेंटल हेल्थ की बात करना मतलब सरकार की विफलता की बात करना है और सरकार की विफलता की बात करोगे तो बदला तो लिया ही जाएगा.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...