उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सम्बन्ध में एक पत्रकार ने मजाकिया अंदाज में सोशल मीडिया पर एक अदद टिप्पणी क्या कर दी, साहब का दिमाग ही भन्ना गया. आनन-फानन में पत्रकार को उठा कर कालकोठरी में डलवा दिया. यह तो शुक्र है कि देश में अभी भी कानून का राज कायम है, तो सुप्रीम कोर्ट की फटकार खाकर यूपी पुलिस ने उसको छोड़ दिया, वरना 14 दिन में तो सत्ता के इशारे पर बेचारे का भुरकस निकल जाता. इस घटना के बाद से ही सोशल मीडिया के नफे-नुकसान पर बहस का दौर जारी है.

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