अपनी निजी जिंदगी में शिल्पा शिंदे कतई बोड़म नहीं हैं, जैसा कि भाबी जी घर में हैं टीवी सीरियल में उनका नल्ला आशिक पड़ोसी विभु यानि विभूति नारायण मिश्रा उन्हें कहता रहता है. मनोविज्ञान की छात्रा रही शिल्पा ने कांग्रेस जौइन करते वक्त यह बेवजह नहीं कहा था कि कांग्रेस पार्टी धर्म और जाति की राजनीति नहीं करती और वह भी कभी जाति की राजनीति नहीं करेंगी.

गौर करने लायक बात यह है कि शिल्पा ने बार बार जाति का जिक्र खासतौर से ऐसे किया मानो वह राजनीति में सफल हुई तो देश से जात पात का कहर और जहर खत्म कर देगी. सोचना स्वभाविक है कि आखिर वह क्यों जाति को लेकर इतनी गंभीर और आक्रामक हैं. इस भूतपूर्व  अंगूरी भाभी के अधिकांश प्रशंसक भी नहीं जानते कि वह दलित समुदाय से ताल्लुक रखती हैं. हालांकि शिल्पा के पिता हाईकोर्ट के जज रहे हैं, इस नाते वह संपन्न पारिवारिक प्रष्ठभूमि की है लेकिन जाति को लेकर उसका पूर्वाग्रह या अनुभव कुछ भी कह लें अगर झलक रहा है तो जाहिर है कांग्रेस के ही जरिये राजनीति में आने का उसका फैसला बेहद परिपक्व उसे साबित करता है.

महाराष्ट्र की राजनीति में दलित हमेशा से ही बड़ा फेक्टर रहे हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने दलित नेता रामदास अठावले को न केवल अपने साथ मिला लिया था, बल्कि उन्हें केंद्र में मंत्री भी बना दिया था लेकिन जब तब उनका दर्द फूट ही पड़ता है. अब 2019 में अठावले भाजपा के साथ जाएंगे या नहीं यह अभी कोई नहीं कह सकता क्योंकि शिवसेना ने अपने पत्ते पूरी तरह खोले नहीं हैं और कांग्रेस एनसीपी गठबंधन परवान चढ़ चुका है.

ऐसे में जब पूर्व गृहमंत्री दलित समुदाय के ही सुशील कुमार शिंदे बढ़ती उम्र के चलते दलित वोटर पर से अपनी पकड़ खो रहे हैं तब शिल्पा का कांग्रेस में जाना नए दलित नेतृत्व की ही तरफ इशारा कर रहा है. शिल्पा खूबसूरत हैं चर्चित हैं लिहाजा कांग्रेस को फायदा ही पहुंचाएंगी, एवज में उसे किसी दलित बाहुल्य सीट से कांग्रेस मौका भी दे सकती है जिसके पास खासतौर से मुंबई में जिताऊ चेहरों का टोटा है.

अपने शुरुआती बयानों से ही शिल्पा ने दलितों को लुभाने की कवायद कर दी है और राहुल प्रियंका गांधी में निष्ठा जताते खुद की योग्यता भी साबित कर दी है. लोकसभा चुनाव में अब गिने चुने दिन बचे हैं और फिल्मी सितारों की राजनैतिक महत्वाकांक्षाएं भी अंगड़ाइया लेने लगीं हैं. हाल ही में हिंदी और बंगला फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने भाजपा का दामन थामा है. तय है भाजपा उन्हें चुनावी मैदान में उतारेगी, हालांकि मौसमी अब बूढ़ी हो चली हैं और नई पीढ़ी उन्हें उतना नहीं जानती जितना कि शिल्पा शिंदे जैसी टीवी एक्ट्रेस को जानती है.

देखना दिलचस्प होगा कि शिल्पा ने कांग्रेस को सही पकड़ा है या गलत. एक वक्त में जब उन्हें भाबी जी ….. सीरियल से बेइज्जत कर बाहर निकाला गया था तो उन्होंने आसमान सर पर उठा लिया था. अब भाभी जी कांग्रेस में हैं और जात पात से राजनीति का श्रीगणेश कर रहीं हैं तो साफ दिख रहा है कि उनकी नई भूमिका की स्क्रिप्ट और डायलोग कांग्रेसी स्टूडियो में लिखे जा रहे होंगे.

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