मोदी-सरकार में जिस तरह देश की बड़ी और सम्मानित संस्थाओं की गरिमा खत्म हुई है, ऐसा इस देश के इतिहास में कभी नहीं हुआ. यह बात आइने की तरह साफ है कि सत्ता की लालसा में केन्द्र की जांच एजेंसियों को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे मोदी-शाह लोकसभा चुनाव 2019 से पहले अपने राजनीतिक विरोधियों को कानून के शिकंजे में कस देना चाहते हैं. चुनाव प्रचार से दूर रखने के लिए वह उन्हें जेल में ठूंस देना चाहते हैं. चुनावी रणभेरी बजने के साथ ही केन्द्रीय जांच एजेंसियां खूब सक्रिय दिखने लगी हैं. अखिलेश यादव, मायावती, राबर्ट वाड्रा के बहाने से गांधी परिवार और अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मोदी-शाह के निशाने पर हैं और सत्ता की कठपुतली बनी सीबीआई जिस तरह मोदी-शाह के राजनीतिक मकसद साधने में अपनी इज्जत गंवा रही है, यह चिन्ता का विषय है. हैरानी की बात है कि आज एक व्यक्ति की सत्ता-लोलुपता के आगे देश की सम्मानित संस्थाएं अपनी गरिमा की रक्षा नहीं कर पा रही हैं!

कभी सुना था कि किसी राज्य की पुलिस ने पूछताछ के लिए आये सीबीआई के अधिकारियों को गिरफ्तार कर थाने पर बिठा लिया. कभी सुना था कि राज्य पुलिस की इतनी हिम्मत हो गयी कि उसके सिपाहियों ने सीबीआई अधिकारियों के कौलर पकड़ कर उनसे धक्का-मुक्की, मारपीट कर डाली. मगर कोलकाता में ऐसा हुआ. केन्द्र सरकार के अधीन देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के अधिकारी 3 फरवरी 2019 को पश्चिम बंगाल की पुलिस के हाथों न सिर्फ जलील हुए, पीटे गये, बल्कि गिरफ्तार करके घंटों थाने में बिठाये गये. यही नहीं कोलकाता सीबीआई के संयुक्त निदेशक पंकज श्रीवास्तव तो मारे डर के तीन घंटे तक अपनी तेरह वर्षीय बेटी और पत्नी के साथ घर के अंदर बंद रहे. शर्मनाक! मोदी-राज में यह ताकत और यह इज्जत रह गयी है देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई की!

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