रिहाना के एक ट्वीट ने भारतीय समाज की वह छवि सामने ला दी है, जो लागातार धर्मांध और महिला विरोधियों द्वारा छुपाई जाती रही है. जो कहती है कि अगर आप एक राय अथवा ओपिनियन देने वाली महिला हैं तो आप की राय पर चर्चा से ज्यादा माहौल इस बात पर गर्म होगा कि आप ने यह कहने की हिम्मत कैसे कर दी. चर्चा का बिंदु आप की राय से अधिक आप का चरित्र होगा, जिसे लगातार तारतार किया जाएगा. फिर शुरू हो जाएगी वह सारी चारित्रिक छींटाकसी जिस के आधार पर सालोंसाल तक महिलाओं के आजाद खयाल कुतरे गए. उन्हें दासी बनाया गया, ना सिर्फ उन की आजादी को रोका गया, साथ ही भोग मात्र की वस्तु समझा गया.

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