किसानों सरकार ने किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि देकर उनको ‘परजीवी’ बना दिया. खेती करने के बजाये 5 सौ रूपये महीनें की सरकारी सहायता पाकर वह खुश है. उन्हे ‘एमएसपी’ की नहीं ‘किसान सम्मान निधि‘ की जरूरत अधिक है. ऐसे लोगो को खेत से नहीं सम्मान निधि से लगाव है. किसान परजीवी बना रहेगा तो ना केवल सरकार की दुकान चलती रहेगी बल्कि धर्म की दुकानदारी भी चलेगी. किसान ‘चढावा‘ और ‘चंदा‘ देता रहेगा. जिन किसानों को खेती से प्यार है एमएसपी की चाहत है वह इसको बचाने के लिये जाडा, गर्मी और बरसात की चिंता छोड सरकार के जुल्म और सितम की परवाह किये बिना दिल्ली की सीमा पर डट कर सरकार का मुकाबला कर रहा है. आन्दोलनकारी ‘परजीवी’ नहीं है.

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