लेखक- रोहित और शाहनवाज

26 नवम्बर वह दिन जब देश के शहरी लोगों को इस बात की भनक लगनी शुरू हुई कि 2 महीने पहले सितंबर में, सरकार ने कोरोना को अवसर बना संसद से ऐसे विवादित कृषि कानून पास किए हैं जिसे ले कर आगे आने वाले दिनों में दिल्ली के बोर्डर जाम होने वाले हैं. दिलचस्प बात यह कि जिस समयपार्लियामेंट के 40 किलोमीटर की परिधि में अधिकतर शहरी लोगों को कृषि कानूनों का ‘क’ भी नहीं पता था, उस समय संसद से सैकड़ों किलोमीटर दूर देहातों में रहने वाले किसान इन कानूनों के खिलाफ पहले से चल रहे अपने आंदोलन की रुपरेखा तैयार कर रहे थे.

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