पहले वह खोटा सिक्का था, कहीं भी चल नहीं पाया. लेकिन राजनीति में आने के बाद खरा सोना बन गया है. आजकल जनसभाओं के लिए भीड़ इकट्ठी करने की होड़ के कारण कई युवाओं को पार्टी का झंडा उठा कर सक्रिय सदस्य बनना फायदे का सौदा लग रहा है. यही वजह है, पार्टी का सदस्य बनने से समाज में लोगों के सामने उस की हनक बढ़ती है, साथ ही, पैसे के जुगाड़ का एक जरिया भी बन जाता है. पैसे से इकट्ठा हुई भीड़ को न तो नेता से कोई सरोकार होता है और न ही भीड़ को नेता से. शायद, यही वजह है कि अब नेता मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित करने की जगह विपक्षी दलों पर हमलावर हो कर भाषा की मर्यादा भूल जाया करते हैं.

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