Noida International Airport: पहले ही दिन एयरपोर्ट आने वाले यात्री कैब और बसों के लिए परेशान रहे. मैट्रो कनैक्टिविटी तो अभी दूर की कौड़ी है. डायरेक्ट बस सर्विस ही अभी पूरी तरह तैयार नहीं. लोग घंटों इंतजार करते रहे, महंगे कैबों के चक्कर काटे. दावा किया गया था कि यह दिल्ली के एयरपोर्ट की तर्ज पर है. हाई लेवल की फैसिलिटीज हैं लेकिन पहले दिन ही यह दावा धराशायी हो गया.

सरकार ने इलैक्ट्रिक बसें चलाने की घोषणा जरूर की है लेकिन इस व्यवस्था को अभी सुचारु रूप से काम करने में वक्त लगेगा. इलैक्ट्रिक बसे चलनी शुरू भी हुईं तो यह केवल एयरपोर्ट के दायरे के लिए ही होंगी. नोएडा-ग्रेटर नोएडा जैसे इलाकों में पहले से ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी है. नया एयरपोर्ट चालू हो जाने के बाद भी औटो या टैक्सी वालों की सुलभता नहीं है. बीजेपी सरकार प्रचार तो खूब करती है लेकिन पोल खुलते देर नहीं लगती.

उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार ने पिछले सालों में एयरपोर्ट बनाने का बड़ा शोर मचाया था. दिल्ली के मेट्रो और बस स्टैंडों पर योगी और मोदी के बड़ेबड़े होर्डिंग लगाए गए थे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावे किए कि यूपी अब हवाई कनैक्टिविटी का हब बन जाएगा. खरबों रुपए खर्च कर के कई नए एयरपोर्ट बनाए गए, रिबन काटे गए, फोटो सैशन हुए और प्रचार का तांता बंध गया लेकिन आज जमीनी हकीकत कुछ और ही है. ज्यादातर एयरपोर्ट वीरान पड़े हैं. उड़ानें बंद हैं, यात्री गायब हैं और टैक्सपेयर्स का पैसा प्रचार में स्वाहा हो गया.

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