Delhi Fire Department: दिल्ली फायर डिपार्टमेंट ने दिल्ली सरकार से आग की घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए हर घर में स्मोक डिटैक्टर और वाटर स्प्रिंकलर लगाने की सिफारिश की है. अगर जनता मांगे कि फायर डिपार्टमैंट पूरे शहर में 4 इंच मोटा पाइप बिछा दे जिस से फायर ब्रिगेड जरूरत पड़ने पर पानी ले सके तो क्या सरकार मान जाएगी?
फायर डिपार्टमैंट की इस शिफारिश में दावा किया जा रहा है कि इस से आग से होने वाली मौतों में 97 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. पहली नजर में यह सुझाव बहुत अच्छा लगता है. आखिर कौन नहीं चाहता कि लोगों की जान बचे? लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सुझाव दिल्ली की जमीनी हकीकत को ध्यान में रख कर दिया गया है या यह सिर्फ कागजों पर अच्छा दिखने वाला विचार है जैसा कि पूरे शहर में पानी के प्रेशर वाला पाइप बिछाना?
दिल्ली कोई ऐसा शहर नहीं है जहां सभी लोग बड़ेबड़े फ्लैटों और मौडर्न सोसाइटियों में रहते हों. लाखों लोग झुग्गी बस्तियों, अनधिकृत कालोनियों और बेहद तंग गलियों वाले इलाकों में रहते हैं. कई जगहों पर तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी तक नहीं पहुंच पाती. ऐसे में हर घर में स्प्रिंकलर और स्मोक डिटैक्टर लगाने की बात सुनने में तो अच्छी लगती है लेकिन इसे लागू करना बेहद मुश्किल है. हां कंपल्सरी कर के रिश्वत का एक स्रोत और स्प्रिंकलर बेचने के धंधे बन जाएंगे.
सब से बड़ा सवाल खर्च का है. दिल्ली में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जिन के लिए महीने का बिजली बिल और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना ही बड़ी चुनौती है. ऐसे परिवारों से यह उम्मीद करना कि वे हजारों रुपए खर्च कर के स्मोक डिटैक्टर और स्प्रिंकलर लगवाएंगे, वास्तविकता से आंखें मूंदने जैसा है. अगर सरकार यह व्यवस्था मुफ्त में उपलब्ध कराए तो फिर सवाल उठता है कि क्या सरकार के पास इतना बजट और इच्छाशक्ति है?
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