Hindi Story: “अमित यह तीसरी बार है कि तुम अपनी दुकान समेट कर बैठ गए हो, विक्की बता रहा था कि स्टेशनरी की दुकान में भी तुम्हारा मन नहीं लगता है. पूरा समय तुम्हारा लैपटौप में चला जाता है. ग्राहकों को भी ढंग से अटेंड नहीं करते.”
“पापा, आप मुझ से राय तो लिया करिऐ, अपने मन से कभी जनरल स्टोर, कभी स्टेशनरी खोल कर बैठ जाते हैं.”
“दुकान न खोलें तो तुम क्या करोगे, कौन सी नौकरी है तुम्हारे पास, मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान भी न चला पाए, तुम.”
“पापाजी, थोड़ा धीरज धरो, मैं भी तो दिनरात काम कर रहा हूं.”
“मुझे तो तुम हमेशा मोबाइल और लैपटौप से चिपटे दिखाई देते हो, कोई डिग्री तो हैं नहीं तुम्हारे पास.”
“वही तो समझा रहा हूं आप को, आजकल कमाने के लिए डिग्री नहीं, समझ और नई तकनीक आनी चाहिए, मैं ब्लौग्स बनाता हूं.”
“वो क्या होता है, उस से पैसे मिलते हैं क्या?”
“खूब कमाई होती हैं. मेरे ब्लौग्स पर खूब लाइक मिलते हैं, थोड़े सब्सक्राइबर बढ़ जाएं, तो फिर कमाई ही कमाई है.”
“यह सब्सक्रिप्शन, सब्सकराइबर, ये सब तो सुनता रहता हूं पर फायदा क्या है इस से?”
“पापा, जो ब्लौग्स लोगों के काम का होता हैं या बहुत मजेदार होता है, वह वायरल हो जाता है और उस रील या ब्लौग्स बनाने वाला फेमस हो जाता है. फिर उस के नएपुराने सभी रील और ब्लौग्स को लोग नैट से खोज निकालते हैं और वो भी वायरल हो जाते हैं.”
“वायरल, मतलब?”
“मतलब प्रसिद्ध, फिर पैसा ही पैसा, घरबैठे अकाउंट में आने लगता है,” अमित ने अपने पिता रोहनदास को समझाया.
“ बेटा, जो तुम्हें उचित लगे, करो. मुझे तो तुम्हारे भविष्य की चिंता लगी रहती है. तुम ब्लौग में क्या दिखाते हो?”
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