केन्द्र सरकार का नोटबंदी का फैसला भारतीय जनता पार्टी के लिये परेशानी भरा सबब हो सकता है. यह बात केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भलीभांति पता चल चुकी है. केन्द्र सरकार नोटबंदी के प्रभाव को देखते हुये 10 दिन के अंदर अपने ही कई फैसले अलटपलट रही है. हालात यह है कि जनता की परेशानियों को देखते हुये सुप्रीम कोर्ट को सरकार के कामकाज पर टिप्पणी करने के लिये मजबूर होना पडा.

सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार से पूछा कि क्या केन्द्र दंगों का इंतजार कर रहा है ? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केन्द्र सरकार ने कहा था कि जनता को राहत मिलेगी इसके बाद 4500 रूपये बदलने की सीमा को घटाकर 2000 कर दिया गया. सुप्रीम कोर्ट की ही तरह से कोलकत्ता हाईकोर्ट ने नोटबंदी पर कहा कि सरकार रोजरोज नये फैसले ले रही है. इससे साफ है कि केन्द्र सरकार ने नोटबंदी के फैसले को लागू करने से पहले कोई होमवर्क नहीं किया. जिससे लोगों को परेशानी हो रही है.

नोटबंदी से अधिक उसके तरीके पर सवाल उठ रहे हैं. विरोधी दलों को भाजपा ने अपने खिलाफ बताकर उनकी बात को हल्का करने की कोशिश की. दूसरे आलोचकों को भी कालाधन समर्थक बताने का अभियान चला. अब अदालत की टिप्पणी के बाद केन्द्र सरकार बैकफुट पर है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा के सांसदों से कहा है कि वह शनिवार-रविवार को अपने संसदीय क्षेत्र में रहें और नोटबंदी पर लोगों को समझाये.

भाजपा की परेशानी यह है कि जनता से लेकर नेता तक नोटबंदी का पक्ष लेते हुये भी इसके तरीके और जनता की परेशानियों पर केन्द्र सरकार को घेर रहे हैं. पुराने नोट बदलने को लेकर कभी समय सीमा बढी, तो कभी इसके तौर तरीके बदले. जिससे जनता को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ा. कालेधन से अधिक परेशान मेहनत से कमाने वाले सफेद धन रखने वाले लोग हुये. 8 नवम्बर से 18 नवम्बर के बीच 10 दिन में केन्द्र सरकार के नये नये कदम उठाने से साफ होने लगा कि केन्द्र सरकार ने नोटबंदी का फैसला सही ढंग से फैसले से लागू नहीं किया गया.

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