यही रिपोर्ट और उसके आंकड़े अगर तयशुदा वक्त यानि दिसंबर 2018 में जारी कर दिये जाते तो लोकसभा चुनाव नतीजों की तस्वीर कुछ और होती. लेकिन नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की नीयत का खोट अब उजागर होने लगा है. कैसे उन्होंने बेरोजगारी जैसे अहम और संवेदनशील मुद्दे पर बेरोजगारों को गुमराह कर उनके वोट राष्ट्रवाद के नाम पर झटके. खुद सरकार द्वारा ही जारी रिपोर्ट में बड़ी मासूमियत से यह सच स्वीकार लिया है कि हां देश में बेरोजगारी की दर 6.1 फीसदी है, और यह पिछले 45 साल में सबसे ज्यादा है .

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