भारतीय राजनीति भी बड़ी अजीब है. दिल्ली बौर्डर पर जहां एक तरफ किसानों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस, बौछारें छोड़ कर उन्हें दिल्ली में घुसने से रोका जा रहा था, तो वहीं दूसरी तरफ 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर दिल्ली के बुराड़ी में शाम लगभग 5 बजे एक कार्यक्रम आयोजित कर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल एशियन गेम्स में निशानेबाजी में रजत पदक जीते दीपक कुमार डेढ़ा को सम्मानित कर रहे थे.

केजरीवाल ने दीपक को 75 लाख रुपए की राशि बतौर इनाम में दी और खेल को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार और खुद की पीठ थपथपाई और खेल खिलाड़ी दोनों को प्रोत्साहित करते रहने का भरोसा दिलाया.

दिव्या का आरोप

मालूम हो कि पिछले दिनों एशियन गेम्स 2018 में ब्रौंज मैडल जीत कर दिल्ली आई दिव्या ककरण ने सीधे सीधे दिल्ली के सीएम केजरीवाल पर हमला बोलते हुए कहा था कि जब कोई खिलाड़ी पदक जीतता है तो फिर सभी राजनीतिक पार्टियां श्रेय लेने और सम्मानित करने के लिए आगे आ जाती हैं और यही खिलाड़ी जब संघर्ष कर रहे होते हैं, तो उनकी सुध कोई नहीं लेता.

दिव्या ने कहा था कि दिल्ली सरकार अगर पहले ही खिलाड़ियों को सुविधाएं दे रही होती तो आज मैं ब्रौंज नहीं गोल्ड मैडल देश के लिए जीत कर आती.

वैसे भारतीय राजनीतिक दलों की आंखें तब खुलती हैं, जब होहल्ला मचता है और मीडिया सवाल पूछने लगती है. फिर सरकार आनन फानन में उसकी लीपापोती करती है.

दीपक डेढा को केजरीवाल ने देर से ही सही पर सम्मानित किया पर बात सिर्फ इतने से ही नहीं बनेगी. दिल्ली सरकार को खेलों को बढ़ावा देने के लिए जमीनी रूप से काम करने होंगे, खिलाड़ियों को तमाम सुविधाएं देनी होंगी.

मेहनत रंग लाई

बुराड़ी में जिस दीपक कुमार डेढ़ा को केजरीवाल सरकार ने 75 लाख रुपए का चेक दिया उस ने आम भारतीय खिलाड़ियों की तरह संघर्ष किया, फांके खाए, जगह जगह खुद को साबित किया. पर सुखद यह है कि आखिर केजरीवाल को इस खिलाड़ी की याद आई और विपक्षी पार्टी भले ही इसे राजनीति में बने रहने की स्टंटबाजी कहे पर इससे अन्य  खिलाड़ियों का हौसला तो बढ़ेगा ही.

कार्यक्रम के दौरान आम आदमी पार्टी के कई नेता और विधायक भी इस दौरान मौजूद थे.

जिस समय दिल्ली के सीएम केजरीवाल दीपक कुमार डेढ़ा को सम्मानित कर रहे थे, उस समय वहां हजारों लोग जुटे थे, जिनमें से कइयों ने दीपक को सुबह शाम दौड़ लगाते हुए, आते जाते हुए देखा था, अब दीपक की प्रशंसा करते नहीं थक रहे थे, वहीं केजरीवाल की तारीफ में भी कसीदे पढ़ रहे थे. पर फिलहाल बाजी और दिल दोनों केजरीवाल ने ही जीते.

एक सवाल किसानों का

उधर दिल्ली के बौर्डर पर किसान केंद्र सरकार को कोस रहे थे कि नोटबंदी, जीएसटी, पैट्रोल डीजल की बढ़ी कीमत, महंगाई के बाद सरकार ने लाठी बरसा कर हमें नायाब तोहफा दिया.

पर क्या केंद्र सरकार की आंखें खुलेंगी जो पिछले 4 साल से हवन, यज्ञ, कुंभ मेले के आयोजन में मसरूफ रह कर आम जनता की मूल समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है?

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