एक अक्तूबर को इलाहाबाद हाइकोर्ट का एक अहम फैसला आया था जिसमें मुख्य न्यायाधीश डीबी भोंसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने वह याचिका खारिज कर दी थी जिसमें 1400 करोड़ के स्मारक घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई थी. याची शशिकांत पाण्डेय की याचिका कोर्ट ने यह कहते खारिज की थी कि यह व्यक्तिगत हित में दाखिल की गई है. गौरतलब है कि बसपा प्रमुख मायावती के कार्यकाल में हुये इस भीमकाय घोटाले में शशिकांत का भाई संतोष पाण्डेय भी शामिल है.

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