केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकार को पता था कि ‘किसान क्रांति या़त्रा’ में शामिल किसान अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिये कमर कस चुके हैं. इस यात्रा में मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसानों के साथ हरियाणा और पंजाब के किसान शामिल हैं. किसी भी सरकार ने इस यात्रा को गंभीरता से नहीं लिया. केन्द्र सरकार ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह और दूसरे लोगों की मीटिंग बुलाई तब तक देर हो चुकी थी.

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