Kanwar Yatra: उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार और बुलडोजर संस्कृति का राग इतना ज्यादा अलाप दिया गया है कि जैसे यहां पर निर्माण का काम इतना ज्यादा हो गया तो अब प्रदेश जैसे नई ऊंचाइयां छूने लगा है, पर कड़वी हकीकत यह है कि कांवड़ यात्रा के चलते गाजियाबाद में 12 अगस्त तक स्कूल बंद कर दिए गए हैं.

जी हां, 9-10 दिन की इस छुट्टी दे कर स्कूलों ने औनलाइन कक्षाओं और व्हाट्सऐप के जरिए पढ़ाई का काम भेजने का इंतजाम किया गया है, पर इस के लिए छात्रों के पास एक अदद स्मार्टफोन भी तो होना चाहिए, लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कई बच्चों के पास स्मार्टफोन लगातार उपलब्ध हो यह जरूरी तो नहीं.

सरकारी स्कूलों में अमूमन उस वंचित समाज के गरीब बच्चे पढ़ाई करते हैं, जहां मांबाप के स्मार्टफोन होना लग्जरी होता है और अगर किसी के पास मिल भी जाए तो उसे बच्चे को पढ़ाई के लिए दे देना कोई हंसीखेल नहीं है. ऐसे में बच्चों के लिए टीचर की मदद के बिना पढ़ाई जारी रखना बड़ी चुनौती बन गया है.

दरअसल, 4 अगस्त को गाजियाबाद के जिला विद्यालय निरीक्षक ने जिले के सभी स्कूलों को 12 अगस्त तक बंद रखने का आदेश दिया था. इस के पीछे कांवड़ियों के गुजरने और छात्रों की सुरक्षा को वजह बताया गया था. पर सवाल उठता है कि कांवड़ यात्रा से स्कूली छात्रों की सुरक्षा का क्या लेनादेना? कांवड़िए तो भोले के भक्त होते हैं, जो खुद बहुत भोले और धार्मिक कहे जाते हैं, उन के सड़क से गुजरने पर स्कूली छात्रों को किसी तरह का डर नहीं होना चाहिए. और यह कोई कोरोना जैसी बड़ी आपदा भी नहीं है कि औनलाइन एजुकेशन दी जाए.

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